*तालाब किनारे मिली लाश, पुलिस ने साधी चुप्पी*
*तालाब किनारे मिली लाश, पुलिस ने साधी चुप्पी*
बाँदा-ब्यूरो
अल्तमश हुसैन
बांदा। योगी राज में अपराधियों को चुनौती दे रही बांदा पुलिस के नाक के नीचे एक ऐसा कांड हो गया जिसने पूरे जिले को हिला कर रख दिया है। तिंदवारी थाना क्षेत्र के छापर गांव के तालाब किनारे सुबह-सुबह एक युवक की लाश मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक कोई और नहीं, गांव का ही होनहार युवक उमेश है। जो हंसता-खेलता घर से निकला था,उसकी लाश तालाब किनारे पड़ी मिली। मृतक की बहन फूल कुमारी का फूट-फूट कर रोना देखकर पत्थर दिल भी पिघल जाए। बिलखते हुए उसने बताया हमारा चाचा का लड़का उमेश घर से निकला था। गांव में हल्ला मचा कि तालाब किनारे मरा पड़ा है। हम भागे-भागे गए तो देखा, मेरा भाई उमेश खून से लथपथ पड़ा था। उसे मारकर फेंका गया है।परिजनों का साफ आरोप है कि उमेश की पीट-पीट कर हत्या कर शव को तालाब किनारे फेंक दिया गया ताकि इसे हादसे का रूप दिया जा सके। इस हत्याकांड के बाद सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्यशैली पर खड़ा हो रहा है। सूचना पर पुलिस मौके पर आई तो, लेकिन पंचनामा कर खानापूर्ति कर चली गई। हत्या है या हादसा? कुछ भी बताने को तैयार नहीं। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए थाना प्रभारी को फोन लगाया तो घंटी बजती रही, लेकिन थानेदार ने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा। युवक की संदिग्ध मौत के बाद छापर गांव में मातम के साथ-साथ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की तत्काल हत्या के एंगल से जांच हो, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक हो और दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाया जाए। अब देखना होगा कि मौन धारण किए बैठी पुलिस कब जागती है, या फिर एक और गरीब परिवार की चीख दबकर रह जाएगी।
बाँदा-ब्यूरो
अल्तमश हुसैन
बांदा। योगी राज में अपराधियों को चुनौती दे रही बांदा पुलिस के नाक के नीचे एक ऐसा कांड हो गया जिसने पूरे जिले को हिला कर रख दिया है। तिंदवारी थाना क्षेत्र के छापर गांव के तालाब किनारे सुबह-सुबह एक युवक की लाश मिलने से सनसनी फैल गई। मृतक कोई और नहीं, गांव का ही होनहार युवक उमेश है। जो हंसता-खेलता घर से निकला था,उसकी लाश तालाब किनारे पड़ी मिली। मृतक की बहन फूल कुमारी का फूट-फूट कर रोना देखकर पत्थर दिल भी पिघल जाए। बिलखते हुए उसने बताया हमारा चाचा का लड़का उमेश घर से निकला था। गांव में हल्ला मचा कि तालाब किनारे मरा पड़ा है। हम भागे-भागे गए तो देखा, मेरा भाई उमेश खून से लथपथ पड़ा था। उसे मारकर फेंका गया है।परिजनों का साफ आरोप है कि उमेश की पीट-पीट कर हत्या कर शव को तालाब किनारे फेंक दिया गया ताकि इसे हादसे का रूप दिया जा सके। इस हत्याकांड के बाद सबसे बड़ा सवाल पुलिस की कार्यशैली पर खड़ा हो रहा है। सूचना पर पुलिस मौके पर आई तो, लेकिन पंचनामा कर खानापूर्ति कर चली गई। हत्या है या हादसा? कुछ भी बताने को तैयार नहीं। इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष जानने के लिए थाना प्रभारी को फोन लगाया तो घंटी बजती रही, लेकिन थानेदार ने फोन उठाना तक जरूरी नहीं समझा। युवक की संदिग्ध मौत के बाद छापर गांव में मातम के साथ-साथ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने मांग की है कि मामले की तत्काल हत्या के एंगल से जांच हो, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक हो और दोषियों को फांसी के फंदे तक पहुंचाया जाए। अब देखना होगा कि मौन धारण किए बैठी पुलिस कब जागती है, या फिर एक और गरीब परिवार की चीख दबकर रह जाएगी।




