*फसल अवशेष प्रबंधन एवं मृदा स्वास्थ्य सुधार में आधुनिक कृषि*फसल अवशेष प्रबंधन एवं मृदा स्वास्थ्य सुधार में आधुनिक कृषि यंत्रों की भूमिका पर पाँच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण हुआ संपन्न*
कानपुर नगर
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत “फसल अवशेष प्रबंधन एवं मृदा स्वास्थ्य सुधार में आधुनिक कृषि यंत्रों की भूमिका” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ।प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों एवं प्रतिभागियों को फसल अवशेषों के वैज्ञानिक एवं उचित प्रबंधन, पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय एवं मृदा संबंधी दुष्प्रभावों तथा फसल अवशेषों के उपयोग की आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक एवं प्रशिक्षित करना रहा।
पाच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को फसल अवशेष प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों, आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग, अवशेषों को खेत में मिलाने, अवशेषों से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने तथा पराली जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान की गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध आधुनिक कृषि तकनीकों एवं यंत्रीकरण को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
समापन अवसर पर डॉ अरुण कुमार सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए फसल अवशेषों को समस्या के बजाय संसाधन के रूप में उपयोग करने तथा मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक अवशेष प्रबंधन तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. खलील खान ने किसानों के साथ संवाद करते हुए फसल अवशेष प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों, कृषि यंत्रों के उचित उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने किसानों को खेत में फसल अवशेषों के प्रभावी प्रबंधन के लिए आधुनिक यंत्रीकरण को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया।कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ राजेश राय, डॉक्टर दीपक मिश्रा, डॉक्टर शशिकांत सहित अन्य वैज्ञानिकों ने ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) के विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।समापन अवसर पर प्रशिक्षण में प्रतिभाग करने वाले किसानों एवं प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी ज्ञान को अपने खेतों में अपनाने तथा अन्य किसानों को भी फसल अवशेष प्रबंधन एवं पराली न जलाने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। यंत्रों की भूमिका पर पाँच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण हुआ संपन्न*
कानपुर नगर
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत “फसल अवशेष प्रबंधन एवं मृदा स्वास्थ्य सुधार में आधुनिक कृषि यंत्रों की भूमिका” विषय पर आयोजित पाँच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ।प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों एवं प्रतिभागियों को फसल अवशेषों के वैज्ञानिक एवं उचित प्रबंधन, पराली जलाने से होने वाले पर्यावरणीय एवं मृदा संबंधी दुष्प्रभावों तथा फसल अवशेषों के उपयोग की आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक एवं प्रशिक्षित करना रहा।
पाच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को फसल अवशेष प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों, आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग, अवशेषों को खेत में मिलाने, अवशेषों से मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने तथा पराली जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में व्यावहारिक एवं तकनीकी जानकारी प्रदान की गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपलब्ध आधुनिक कृषि तकनीकों एवं यंत्रीकरण को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
समापन अवसर पर डॉ अरुण कुमार सिंह ने किसानों को संबोधित करते हुए फसल अवशेषों को समस्या के बजाय संसाधन के रूप में उपयोग करने तथा मृदा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए वैज्ञानिक अवशेष प्रबंधन तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया।प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. खलील खान ने किसानों के साथ संवाद करते हुए फसल अवशेष प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों, कृषि यंत्रों के उचित उपयोग तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने किसानों को खेत में फसल अवशेषों के प्रभावी प्रबंधन के लिए आधुनिक यंत्रीकरण को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया।कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ राजेश राय, डॉक्टर दीपक मिश्रा, डॉक्टर शशिकांत सहित अन्य वैज्ञानिकों ने ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव (RAWE) के विद्यार्थियों ने सक्रिय सहभागिता की।समापन अवसर पर प्रशिक्षण में प्रतिभाग करने वाले किसानों एवं प्रतिभागियों को प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी ज्ञान को अपने खेतों में अपनाने तथा अन्य किसानों को भी फसल अवशेष प्रबंधन एवं पराली न जलाने के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया।




