पोस्ट डेटेड चेक की गारंटी पर चलता था फर्जी डिग्री का खेल
डिस्ट्रिक हेड। राहुल द्विवेदी
मार्कशीट माफिया शैलेंद्र कुमार ओझा ने फर्जी डिग्री के धंधे को एक अलग ही “भरोसे के मॉडल” पर खड़ा कर रखा था। वह पहले काम पूरा करता, फिर भुगतान लेता। ग्राहकों से सिर्फ पोस्ट डेटेड चेक गारंटी के तौर पर लिया जाता था, जिसे नकद भुगतान के बाद लौटा दिया जाता था। इसी “पहले काम, फिर दाम” की कार्यशैली के कारण वह वर्षों तक बिना किसी शिकायत के पुलिस की नजरों से बचता रहा।
घर बैठे नौ राज्यों के 14 नामी विश्वविद्यालयों की डिग्री और डिप्लोमा सात दिन में उपलब्ध कराने का दावा करने वाला ओझा फिलहाल जेल में है। पुलिस और एसआईटी सूत्रों के अनुसार, ग्राहक से तय रकम का पोस्ट डेटेड चेक लिया जाता था, शर्त यह रहती थी कि चेक छात्र या उसके पिता के बैंक खाते का हो। काम पूरा होने के बाद नकद भुगतान लिया जाता और चेक वापस कर दिया जाता था।
छापे में मिले कई पोस्ट डेटेड चेक
जूही गौशाला स्थित कार्यालय में छापेमारी के दौरान पुलिस को बड़ी संख्या में पोस्ट डेटेड चेक बरामद हुए। जांच में यह भी सामने आया कि ओझा विश्वविद्यालयों के बाबुओं को भी लाखों रुपये के ब्लैंक चेक गारंटी के रूप में देता था और बाद में नकद भुगतान करता था। इस दोहरी गारंटी प्रणाली ने पूरे नेटवर्क को लंबे समय तक सुरक्षित बनाए रखा।
पांच टीमों में बंटी 14 सदस्यीय एसआईटी
किदवई नगर पुलिस द्वारा गिरोह का भंडाफोड़ किए जाने के बाद मामले की जांच 14 सदस्यीय एसआईटी को सौंपी गई है। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने एसआईटी का गठन किया है। नेतृत्व एडीसीपी साउथ योगेश कुमार करेंगे। टीम में एक एसीपी, क्राइम ब्रांच के तीन इंस्पेक्टर, छह सब इंस्पेक्टर और तीन सिपाही शामिल हैं। एसआईटी को पांच अलग-अलग टीमों में बांटकर जांच सौंपी गई है।
ऐसे बंटी थीं जिम्मेदारियां
गिरोह में हर सदस्य की भूमिका तय थी। एक व्यक्ति को एक या दो विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी दी जाती थी। किस बाबू से काम कराया जा रहा है, इसकी जानकारी या तो संबंधित सदस्य को होती थी या सिर्फ शैलेंद्र को।
जिन विश्वविद्यालयों के नाम आए सामने
मंगलायतन विश्वविद्यालय – यहां से मनचाही डिग्री लाने का काम मयंक भारद्वाज देखता था।
Lingaya’s Vidyapeeth – फरीदाबाद स्थित इस विश्वविद्यालय का काम मनीष संभालता था।
Monad University – हापुड़ स्थित इस विश्वविद्यालय से संबंधित कार्य विनीत के जिम्मे था।
Shri Krishna University – यहां की डिग्रियों का काम शुभम दुबे और गौतम देखते थे।
Asian International University – मणिपुर स्थित इस यूनिवर्सिटी से डिग्री और मार्कशीट उपलब्ध कराने का जिम्मा सेखू उर्फ ताबिश के पास था।
Himalayan University – ईटानगर स्थित इस विश्वविद्यालय की डिग्रियां नागेंद्र उपलब्ध कराता था।
इसके अलावा एलएलबी, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की मार्कशीट का जिम्मा जोगेंद्र के पास था, जबकि मेडिकल और प्रोफेशनल कोर्स की डिग्रियां अलग-अलग सदस्यों के माध्यम से तैयार कराई जाती थीं।




