लखनऊ हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर जुटे और 7,500 रुपए का स्टाइपेंड बढ़ाकर 25 हजार रुपए करने की मांग की। छात्रों का कहना है कि 2011 से अब तक स्टाइपेंड में एक रुपए की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है, जबकि MBBS और BDS इंटर्न का स्टाइपेंड बढ़ चुका है।
बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं गांधी प्रतिमा पर जुटे हैं। कई छात्र छाता लेकर तो कुछ पोस्टर सिर पर रखकर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी Gen Z के अंदाज में पोस्टर लेकर पहुंचे। इनमें ‘कुचुपुचु स्टाइपेंड बढ़ा दो’, ‘पुकि सरकार दे दो 25 हजार’, ‘मेहनत हमारी पूरी है, 25 हजार मांग जरूरी है’ और ‘काम हमारा पूरा, स्टाइपेंड क्यों आधा-अधूरा’ जैसे नारे लिखे हैं।
छात्रों का कहना है कि कॉलेज में पढ़ाई के साथ मरीजों के इलाज और अस्पताल से जुड़े कामों में भी वे जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद उनका स्टाइपेंड लंबे समय से 7,500 रुपए पर ही है। बढ़ती महंगाई में इतनी रकम में खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
डॉक्टर प्रखर ने कहा, “हम आयुर्वेद के छात्र हैं। नीट पास करने के बाद इस कोर्स में दाखिला लेते हैं। साढ़े चार साल की पढ़ाई के बाद एक साल की इंटर्नशिप करनी होती है। 2011 से 2026 हो गया,
बहुत से छात्र कमरा किराए पर लेकर रहते हैं। जितना स्टाइपेंड हमें मिलता है, उसमें एक कमरा भी किराए पर नहीं मिल पाता। बाकी खर्च हम कैसे पूरा करेंगे? हमें करीब 250 रुपए प्रतिदिन मिलते हैं। इससे ज्यादा तो एक दिहाड़ी मजदूर कमा लेता है। पिछले 15 साल में महंगाई कहां से कहां पहुंच गई, लेकिन हमारा स्टाइपेंड वहीं का वहीं है।
‘सम्मानजनक स्टाइपेंड कि मांग’
हमें जो पैसा मिल रहा है, वह बेहद अपमानजनक है। इससे अच्छा है कि सरकार हमें कुछ न दे, हम मुफ्त में सेवा करने के लिए तैयार हैं। इससे पहले एमबीबीएस इंटर्न ने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद उनका स्टाइपेंड 12 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए कर दिया गया। हमारा काम भी उन्हीं के बराबर है। फिर हमें यह स्टाइपेंड क्यों नहीं दिया जा रहा? जब मेहनत बराबर है तो पैसा भी बराबर क्यों नहीं।
शेज़ीला की रिपोर्ट




