*डी.ए-वी. कॉलेज में ‘व्यास पूजन उत्सव’ एवं ‘गुरु-शिष्य परम्परा’ पर परिचर्चा आयोजित
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कानपुर। डी.ए-वी. कॉलेज, कानपुर एवं भारतीय शिक्षण मंडल, कानपुर प्रान्त के संयुक्त तत्वावधान में डाॅ. नागेन्द्र स्वरूप स्मृति व्याख्यानमाला के अन्तर्गत ‘व्यास पूजन उत्सव’ के साथ “गुरु-शिष्य-परम्परा” विषय पर एक गरिमापूर्ण परिचर्चा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पी. पी. एन. कॉलेज, कानपुर के प्राचार्य प्रोफेसर अनूप कुमार सिंह ने भारतीय शिक्षण मंडल का विस्तृत परिचय दिया तथा उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “भारत में गुरु-शिष्य परम्परा का शुभारम्भ आदिगुरु महर्षि व्यास से होता है। महर्षि व्यास के पटु शिष्य शुकदेव जी थे। गुरु वही है जो शिष्य को अविवेक से विवेक की ओर ले जाए, और जिसमें सच्चा ‘गुरुत्व’ समाहित हो वही वास्तविक गुरु है।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारतीय शिक्षण मंडल के अखिल भारतीय उपाध्यक्ष डाॅ. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि “गुरु-शिष्य परम्परा हमारी संस्कृति का मूल आधार है। इसी परम्परा और मूल्यों के कारण हमारी भारतीय संस्कृति अनादिकाल से जीवन्त एवं अक्षुण्ण बनी हुई है।”
अतिथियों का स्वागत करते हुए डी.ए-वी. कॉलेज के प्राचार्य प्रोफेसर मनोज जौहरी ने कहा कि “गुरु केवल किताबी ज्ञान देने का माध्यम नहीं है, बल्कि वह व्यक्ति को सम्पूर्ण जीवन दृष्टि प्रदान करने वाला पथप्रदर्शक होता है।”
इस अवसर पर मुख्य रूप से प्रो. चन्दन प्रसाद, प्रो. सुनील सिंह, प्रो. राजेश कुमार तिवारी, डाॅ. कुमुदबाला, डाॅ. पूजा सिन्हा, प्रो. बिनोद पाण्डेय, प्रो. ओमपाल सिंह, प्रो. रजत श्रीवास्तव, डाॅ. दिवाकर जी, डाॅ. चारु, डाॅ. हनी, डाॅ. सोम्या, डाॅ. प्रतिभा त्रिपाठी, डाॅ. सवितुर, डॉ. राजन दीक्षित सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन डाॅ. मोनिका अग्रवाल ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. यतीन्द्र सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया।
राजन दीक्षित की रिपोर्ट




