कानपुर | 23 जुलाई, 2026
दिल्ली में छात्र-आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में एसएफ़आई कानपुर ने प्रारंभ किया जनहस्ताक्षर अभियान

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफ़आई), कानपुर जिला कमेटी ने दिल्ली में शिक्षा, छात्र अधिकारों एवं परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चल रहे शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में आज से शहरव्यापी जनहस्ताक्षर अभियान प्रारंभ किया। यह अभियान 23 जुलाई से 28 जुलाई, 2026 तक कानपुर नगर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों, बाजारों एवं सार्वजनिक स्थलों पर संचालित किया जाएगा। अभियान के उपरांत प्राप्त हस्ताक्षरों सहित विस्तृत ज्ञापन जिलाधिकारी, कानपुर नगर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदया को प्रेषित किया जाएगा।
एसएफ़आई कानपुर ने कहा कि पिछले दो महीनों से देशभर के छात्र शिक्षा के निजीकरण, लगातार सामने आ रहे परीक्षा घोटालों, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की कार्यप्रणाली में सुधार तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री की जवाबदेही की मांग को लेकर शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक आंदोलन कर रहे हैं। 20 जुलाई को संसद की ओर आयोजित मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई से संबंधित राष्ट्रीय समाचार माध्यमों में प्रकाशित रिपोर्टों, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो सामग्री तथा प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर प्रदर्शनकारी छात्राओं एवं छात्रों के साथ यौन उत्पीड़न, अभद्र व्यवहार, अत्यधिक बल प्रयोग, पैलेट गन एवं शॉक बैटन के प्रयोग तथा मानवाधिकार उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। इन घटनाओं ने देशभर के छात्र-युवाओं, शिक्षकों, अधिवक्ताओं एवं लोकतांत्रिक नागरिकों के बीच गंभीर चिंता उत्पन्न की है।
संगठन ने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 प्रत्येक नागरिक को विधि के समक्ष समानता का अधिकार प्रदान करता है। अनुच्छेद 19(1)(क) एवं 19(1)(ख) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा शांतिपूर्ण एवं निःशस्त्र सभा करने के अधिकार की गारंटी देते हैं, जबकि अनुच्छेद 21 प्रत्येक नागरिक के जीवन, व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं गरिमा की रक्षा सुनिश्चित करता है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर नागरिकों के मौलिक अधिकारों का अनावश्यक अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं हो सकता। संगठन ने मांग की कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
महबूब आलम, जिला संयोजक, एसएफ़आई कानपुर ने कहा,
“पिछले दो महीनों से देशभर के छात्र शिक्षा के निजीकरण, परीक्षा घोटालों, एनटीए की कार्यप्रणाली में सुधार तथा शिक्षा मंत्री की जवाबदेही की मांग को लेकर लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग, मानवाधिकार उल्लंघन अथवा महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार जैसे आरोप सामने आते हैं, तो यह केवल छात्रों का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र का भी प्रश्न है। एसएफ़आई कानपुर इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तथा पीड़ित छात्रों को न्याय दिलाने की मांग करता है।”
आराध्य बाजपेयी, विधि छात्र, एसएफ़आई उत्तर प्रदेश राज्य कमेटी सदस्य एवं जिला सहसंयोजक ने कहा,
“भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने का अधिकार देता है। यदि किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की गरिमा, नागरिक स्वतंत्रता अथवा मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप सामने आते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच कराना केवल कानूनी आवश्यकता नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है। हमारा जनहस्ताक्षर अभियान न्याय, जवाबदेही, विधि के शासन तथा संविधान की रक्षा के प्रति नागरिक समाज की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति है।”
वैष्णवी सक्सेना, कोर कमेटी सदस्य, एसएफ़आई कानपुर ने कहा,
“लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना अपराध नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है। यदि छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार, यौन उत्पीड़न अथवा अनावश्यक बल प्रयोग के आरोप सामने आए हैं, तो प्रत्येक लोकतांत्रिक संस्था का दायित्व है कि पीड़ितों को न्याय मिले और दोषियों को कानून के अनुसार दंडित किया जाए।”
मरियम जमील, कोर कमेटी सदस्य, एसएफ़आई कानपुर ने कहा,
“देश की छात्राओं को यह विश्वास होना चाहिए कि लोकतांत्रिक आंदोलनों में भाग लेने पर उनकी गरिमा, सुरक्षा और संवैधानिक अधिकार पूर्ण रूप से सुरक्षित रहेंगे। महिलाओं के सम्मान और मानवाधिकारों की रक्षा किसी भी लोकतांत्रिक समाज की मूल पहचान है। हम सभी नागरिकों से इस जनहस्ताक्षर अभियान में सहभागी बनने और न्याय एवं संवैधानिक मूल्यों के समर्थन में अपनी आवाज़ बुलंद करने की अपील करते हैं।”
आज जनहस्ताक्षर अभियान गोल चौराहा, सर्वोदय नगर एवं रावतपुर क्षेत्र में चलाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं, युवाओं एवं नागरिकों ने हस्ताक्षर कर अभियान का समर्थन किया।
अभियान में प्रमुख रूप से महबूब आलम, आराध्य बाजपेयी, जुनैद मंसूरी, अश्वनी मिश्रा, मोहम्मद अल्ताफ, वैष्णवी सक्सेना, मरियम जमील सहित अनेक छात्र-युवा एवं नागरिक उपस्थित रहे।
एसएफ़आई कानपुर ने सभी छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, अधिवक्ताओं, सामाजिक संगठनों तथा लोकतांत्रिक नागरिकों से इस जनहस्ताक्षर अभियान में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। संगठन ने कहा कि न्याय, जवाबदेही, मानव गरिमा तथा संविधान के मूल्यों की रक्षा के लिए उसका लोकतांत्रिक संघर्ष आगे भी निरंतर जारी रहेगा।
जारीकर्ता
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI)
कानपुर जिला कमेटी




