*ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ इटावा में पूर्ण बंदी,जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए केमिस्टों ने बुलंद की आवाज,पीएम को भेजा ज्ञापन
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*ई-फार्मेसी के अवैध जाल, फर्जी AI प्रिस्क्रिप्शन और डीप डिस्काउंटिंग के विरोध में केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स का सड़कों पर फूटा गुस्सा*
नितेश प्रताप सिंह (ब्यूरो इटावा)
इटावा। जनस्वास्थ्य की सुरक्षा, दवाओं की वैध वितरण प्रणाली को अक्षुण्ण रखने तथा छोटे व मध्यम केमिस्टों के अस्तित्व को बचाने के लिए बुधवार को इटावा जनपद के समस्त केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एकजुट होकर सड़कों पर उतर आए। इटावा केमिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन (ECWA) के नेतृत्व में आज दवाओं की अवैध ऑनलाइन बिक्री, फर्जी AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) जनरेटेड ई-प्रिस्क्रिप्शन, बिना चिकित्सकीय परामर्श के धड़ल्ले से हो रही दवा डिलीवरी और ऑनलाइन कंपनियों की अंधाधुंध ‘डीप डिस्काउंटिंग’ नीति के विरोध में एक दिवसीय सांकेतिक बंद रखा गया।इस दौरान जिले भर में दवाओं की दुकानें पूरी तरह बंद रहीं।यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) एवं ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स उत्तर प्रदेश (OCDUP) के आह्वान पर किया गया।बंद के दौरान दवा व्यापारियों ने न सिर्फ अपनी एकजुटता दिखाई, बल्कि एक विशाल जन-जागरूकता रैली भी निकाली। आंदोलन के तहत सुबह से ही व्यापारी शास्त्री चौराहा (स्टेशन बजरिया) पर एकत्र होने शुरू हो गए थे।यहाँ से केमिस्टों ने हाथों में तख्तियां लेकर कचहरी तक एक विशाल मार्च निकाला और जोरदार नारेबाजी करते हुए धरना-प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन के बाद एसोसिएशन के प्रतिनिधिमंडल ने अतिरिक्त एसडीएम श्रीमती दीक्षित से मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
“ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 एवं नियमावली 1945 में ऑनलाइन दवा बिक्री का कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान नहीं है।इसके बावजूद कॉर्पोरेट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म वर्षों से अनियंत्रित व अवैध रूप से दवाओं का कारोबार कर रहे हैं। यह सीधे तौर पर देश के कानून का उल्लंघन है।”
दवा व्यापारियों ने सरकार के सामने मुख्य रूप से निम्नलिखित गंभीर बिंदु और मांगें रखी हैं:
जनस्वास्थ्य से खिलवाड़– बिना सत्यापित ई-प्रिस्क्रिप्शन और क्विक कॉमर्स कंपनियों द्वारा दवाओं की अनियंत्रित होम डिलीवरी से नशीली और प्रतिबंधित दवाओं के दुरुपयोग का खतरा बढ़ गया है।
अस्तित्व का संकट– ऑनलाइन कंपनियों की ‘शिकारी मूल्य निर्धारण’और अंधाधुंध छूट की नीति के कारण देशभर के लाखों लाइसेंसधारी केमिस्टों और छोटे व्यापारियों का रोजगार गर्त में जा रहा है।
काले कानूनों की वापसी– दवा व्यापारियों ने मांग की है कि ऑनलाइन दवाओं को बढ़ावा देने वाले GSR 817(E) एवं GSR 220(E) संशोधनों को तत्काल वापस लिया जाए। “कोविड में जान जोखिम में डाली,आज खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भावुक और कड़े शब्दों में कहा कि कोविड-19 महामारी जैसी भीषण राष्ट्रीय आपदा के समय जब सब कुछ बंद था,तब देश के केमिस्टों ने अपनी जान की परवाह किए बिना चौबीसों घंटे जनता तक दवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित की थी।आज वही केमिस्ट व्यवस्था खुद को असुरक्षित और उपेक्षित महसूस कर रही है।यदि सरकार ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए,तो यह संकट केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश में एक बड़ा जनस्वास्थ्य संकट खड़ा कर देगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण कुमार वर्मा एवं जिला महासचिव मनु गुप्ता ने संयुक्त रूप से कहा यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत स्वार्थ या हित के लिए नहीं है।यह विशुद्ध रूप से जनहित, रोगी सुरक्षा और देश की व्यवस्थित दवा वितरण प्रणाली को बचाने की लड़ाई है।अगर सरकार ने इस अवैध ऑनलाइन कारोबार पर शीघ्र प्रभावी और कठोर कार्रवाई नहीं की,तो आने वाले समय में इस आंदोलन को और अधिक व्यापक और उग्र रूप दिया जाएगा।जिसकी जिम्मेदारी शासन- प्रशासन की होगी।”
इस अभूतपूर्व बंद को UPMSRA के अध्यक्ष अभिषेक जी एवं उनकी पूरी टीम का भी पूर्ण और सक्रिय समर्थन प्राप्त हुआ,जिसके लिए केमिस्ट एसोसिएशन ने उनका विशेष आभार व्यक्त किया। इस विशाल प्रदर्शन और बंदी को सफल बनाने में उमाकांत जैन,नवीन मेहरोत्रा,ऋषभ अग्रवाल,गौरव कांत जैन,विशाल जैन,शशांक जैन,मोहित सिंह,शैलेन्द्र यादव,पिंकी जैन,शशांक दुबे,राजीव शर्मा,प्रशांत पाल,दुष्यंत पुरवार,सतेन्द्र शर्मा,गोलू,महेश वसन्तानी,आनंद गुप्ता,विमल कुशवाहा,अतुल जैन,राजेश अग्रवाल सहित खुशी मेडिकल,एसएस मेडिकल,कीर्ति मेडिकल,माधव मेडिकल,आशीष मेडिकल,गुलजार मेडिकल,यादव मेडिकल,बांके बिहारी मेडिकल,वंशिका मेडिकल के संचालक व बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं दवा व्यापारी उपस्थित रहे।




