*मां का कटा हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर ऑफिस पहुंचा ITBP जवान, कानपुर में मचा हड़कंप*
*डिस्ट्रिक हेड राहुल द्विवेदी*
कानपुर में मंगलवार को एक बेहद भावुक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान विकास सिंह अपनी मां का कटा हुआ हाथ आइस बॉक्स में लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए और अस्पताल पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए इंसाफ की गुहार लगाने लगे। यह दृश्य देखकर पुलिसकर्मी, फरियादी और वहां मौजूद लोग स्तब्ध रह गए। जवान की आंखों में आंसू थे और आवाज में दर्द साफ झलक रहा था। वह बार-बार यही कह रहे थे कि “जिस हाथ से मां ने बचपन में खाना खिलाया, आज उसी हाथ को इंसाफ के लिए लेकर घूम रहा हूं।”
फतेहपुर जिले के खागा तहसील स्थित हथगांव निवासी विकास सिंह वर्तमान में महाराजपुर स्थित आईटीबीपी की 32वीं वाहिनी में तैनात हैं। उन्होंने बताया कि उनकी मां निर्मला देवी (56) को 13 मई को अचानक सांस लेने में दिक्कत हुई थी। इसके बाद उन्हें पहले आईटीबीपी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताते हुए दूसरे अस्पताल रेफर कर दिया। विकास सिंह अपनी मां को एंबुलेंस से सिंहपुर स्थित पारस हॉस्पिटल लेकर जा रहे थे, लेकिन टाटमिल चौराहे पर भारी जाम लगने के कारण उन्होंने रास्ते में ही टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती करा दिया।
जवान का आरोप है कि अस्पताल में उनकी मां को आईसीयू में भर्ती किया गया और हाथ में ड्रिप लगाई गई। अगले दिन जब वह मां से मिलने पहुंचे तो उनके दाहिने हाथ में सूजन दिखाई दी। उन्होंने डॉक्टरों और स्टाफ को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद हाथ में लगा विगो हटा दिया गया। अस्पताल कर्मियों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सूजन धीरे-धीरे ठीक हो जाएगी, लेकिन कुछ ही घंटों बाद हाथ काला पड़ने लगा और सूजन तेजी से बढ़ गई। मां की हालत बिगड़ती देख उन्हें तत्काल कोठारी चौराहे के पास स्थित पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
पारस हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि हाथ में गंभीर संक्रमण फैल चुका है और गैंगरीन हो गया है। डॉक्टरों ने निर्मला देवी की जान बचाने के लिए 17 मई को उनका हाथ काट दिया। इस घटना के बाद परिवार टूट गया। विकास सिंह का आरोप है कि यह सब अस्पताल की लापरवाही के कारण हुआ। यदि समय रहते सही उपचार होता तो उनकी मां का हाथ बचाया जा सकता था।
विकास सिंह ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले रेलबाजार थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने एडीसीपी पूर्वी और एसीपी कार्यालय में भी शिकायत की, मगर उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला। आखिरकार उन्होंने आईटीबीपी अधिकारियों को पूरी जानकारी दी और उनकी अनुमति के बाद मंगलवार को मां का कटा हुआ हाथ आइस बॉक्स में रखकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए।
जैसे ही उन्होंने पुलिस कार्यालय के बाहर बॉक्स खोला और उसमें रखा कटा हुआ हाथ दिखाया, वहां मौजूद लोगों में सनसनी फैल गई। पुलिस स्टाफ तुरंत मौके पर पहुंचा। बाद में मामले की जानकारी पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल को दी गई। पुलिस कमिश्नर ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को जांच के निर्देश दिए और जल्द रिपोर्ट मांगी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए हरिदत्त नेमी ने एसीएमओ डॉ. रमित रस्तोगी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित कर दी है। कमेटी में कई विशेषज्ञ डॉक्टरों को शामिल किया गया है। जांच टीम ने कृष्णा हॉस्पिटल और पारस हॉस्पिटल दोनों से इलाज संबंधी दस्तावेज जुटाने शुरू कर दिए हैं। अधिकारियों के मुताबिक तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
हालांकि कृष्णा हॉस्पिटल प्रबंधन ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है। अस्पताल के प्रबंधक योगेंद्र यादव का कहना है कि मरीज के हाथ का डॉप्लर टेस्ट सामान्य आया था और परिजन स्वयं मरीज को दूसरे अस्पताल ले गए थे। वहीं पारस हॉस्पिटल के डॉक्टरों का कहना है कि मरीज के हाथ में ब्लड फ्लो नहीं था और गैंगरीन तेजी से फैल चुका था, इसलिए हाथ काटना मजबूरी बन गया।
इस पूरे मामले ने शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर भी यह मामला तेजी से वायरल हो रहा है और लोग दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यदि जांच में लापरवाही साबित होती है तो संबंधित अस्पताल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।




