चार विकासखंडों में 10–28 फरवरी तक चलेगा सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान
90% दवा सेवन लक्ष्य के साथ फ़ाइलेरिया उन्मूलन की दिशा में उन्नाव का संकल्प
उन्नाव, 6 फरवरी 2026
राष्ट्रीय फ़ाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत जनपद उन्नाव के चार विकासखंड—सुमेरपुर, गंज मुरादाबाद, बीघापुर एवं पुरवा—में 10 से 28 फरवरी तक सर्वजन दवा सेवन (आईडीए) अभियान संचालित किया जाएगा। अभियान की तैयारियों एवं उद्देश्यों को लेकर शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर) के सहयोग से मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें जिले के प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल मीडिया प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरि नंदन प्रसाद ने कहा कि फ़ाइलेरिया (हाथीपाँव) एक गंभीर, दीर्घकालिक एवं दिव्यांगता उत्पन्न करने वाला मच्छर-जनित रोग है, जो मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से फैलता है। उन्होंने बताया कि जनपद के अन्य विकासखंडों में संक्रमण दर में उल्लेखनीय कमी आई है, इसलिए वहाँ इस वर्ष आईडीए अभियान की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने लक्षित क्षेत्रों के नागरिकों से अपील की कि आशा कार्यकर्ता द्वारा दी जाने वाली दवा बिना किसी हिचक के अवश्य लें और जिम्मेदार नागरिक बनकर अभियान को सफल बनाएं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार फ़ाइलेरिया उन्मूलन के राष्ट्रीय लक्ष्य के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है और अभियान का संदेश—“कोई भी पात्र व्यक्ति न छूटे”—इसी संकल्प को दर्शाता है। फ़ाइलेरिया उन्मूलन के लिए कम से कम 90 प्रतिशत पात्र आबादी द्वारा दवा सेवन अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि अधिकांश संक्रमित व्यक्ति लक्षणहीन वाहक होते हैं और अनजाने में संक्रमण फैलाते हैं।
सीएमओ ने बताया कि आईडीए अभियान पाँच-स्तम्भीय रणनीति पर आधारित है, जिसमें प्रत्यक्ष निगरानी में WHO-अनुशंसित आइवरमेक्टिन, डाईइथाइल कार्बामजीन (डीईसी) एवं एल्बेंडाजोल का सेवन, रुग्णता प्रबंधन एवं रोकथाम, वेक्टर नियंत्रण, अंतर्विभागीय समन्वय तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से रियल-टाइम रिपोर्टिंग शामिल है। वर्ष 2027 तक फ़ाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को देखते हुए अभियान सरकार की प्राथमिकता में है। इसी क्रम में केंद्र की दो सदस्यीय टीम ने हाल ही में जनपद का दौरा कर तैयारियों का जायजा लिया, जबकि आज जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति की बैठक भी प्रस्तावित है।
नोडल अधिकारी/अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि यह दवा एक वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं एवं गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी पात्र व्यक्तियों को दी जाएगी। दवा स्वास्थ्यकर्मी के सामने ही खानी होगी तथा खाली पेट दवा नहीं लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि दवा सेवन के बाद चक्कर आना, जी मिचलाना या हल्का बुखार जैसे लक्षण सामान्य होते हैं और कुछ समय में स्वतः ठीक हो जाते हैं।
फ़ाइलेरिया से बचाव के सरल उपाय
• घर के आसपास पानी जमा न होने दें
• मच्छरदानी का नियमित प्रयोग करें
• पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें
• लक्षण दिखने पर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र/आयुष्मान आरोग्य मंदिर या आशा से संपर्क करें
• जानकारी के लिए टोल-फ्री नंबर 104 पर कॉल करें
जिला मलेरिया अधिकारी अर्चना मिश्रा ने बताया कि चारों विकासखंडों की लगभग 619518 लक्षित जनसंख्या को अभियान में आच्छादित किया जाएगा। अभियान के सफल संचालन हेतु 103 सुपरवाइज़र एवं 576 टीमों का गठन किया गया है। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पात्र व्यक्तियों को अपने सामने दवा खिलाएंगी। यदि घर पर दवा सेवन संभव न हो तो आशा कार्यकर्ता के घर को डिपो के रूप में चिन्हित किया गया है। दवाओं एवं आवश्यक लॉजिस्टिक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर ली गई है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में जनपद में 3370 लिंफोडिमा एवं 30 हाइड्रोसील सहित कुल 3400 फ़ाइलेरिया रोगी पंजीकृत हैं। प्रत्येक बृहस्पतिवार को जिला मलेरिया अधिकारी कार्यालय में फ़ाइलेरिया क्लिनिक संचालित किया जाता है, जहाँ निःशुल्क जाँच एवं परामर्श उपलब्ध है।
आईडीए अभियान में पाथ, पीसीआई एवं सीफॉर संस्थाओं द्वारा सहयोग प्रदान किया जा रहा है। समुदाय स्तर पर पेशेंट स्टेकहोल्डर प्लेटफॉर्म (पीएसपी) के माध्यम से सीएचओ के नेतृत्व में जनजागरूकता गतिविधियाँ संचालित की जा रही हैं, जिनमें ग्राम प्रधान, कोटेदार एवं अन्य स्थानीय हितधारकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला मलेरिया अधिकारी, बायोलॉजिस्ट, फ़ाइलेरिया निरीक्षक, मलेरिया निरीक्षक, सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि, पीएसपी सदस्य एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।




