भंडरिया के 43 मिनट…कुशाग्र–प्रभात के बीच संघर्ष, कोई चश्मदीद नहीं
CCTV और CDR बने सजा की सबसे मजबूत कड़ी
डिस्ट्रिक हेड | राहुल द्विवेदी
कानपुर। कुशाग्र हत्याकांड में भले ही हत्या का कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों—सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR)—ने पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठा दिया। कोर्ट ने इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर माना कि कुशाग्र की हत्या पूरी साजिश के तहत की गई थी, जिसमें रचिता, प्रभात और शिवा की भूमिका स्पष्ट है।
छोटी सी भंडरिया के भीतर करीब 43 मिनट तक प्रभात और कुशाग्र के बीच जो संघर्ष हुआ, वह किसी ने नहीं देखा। लेकिन पास के हाते में लगे सीसीटीवी कैमरों ने हर अहम गतिविधि रिकॉर्ड कर ली। फुटेज के अनुसार शाम 4:33 बजे कुशाग्र और प्रभात साथ में भंडरिया के अंदर जाते हैं और 5:16 बजे प्रभात अकेला हेलमेट लेकर बाहर निकलता है। इसी दौरान रस्सी से गला घोंटकर कुशाग्र की हत्या की गई।
कोर्ट में 5 घंटे चली CCTV की पड़ताल
मुकदमे की सुनवाई के दौरान करीब पांच घंटे तक कोर्ट रूम में एक-एक सीसीटीवी फुटेज को बारीकी से देखा गया। फुटेज में प्रभात की गतिविधियों के साथ-साथ रचिता और शिवा की संदिग्ध हरकतें भी सामने आईं।
6:02 बजे रचिता प्रभात के घर से बाहर निकलती दिखती है और एक मिनट बाद हेलमेट लेने के लिए दोबारा घर जाती है। जाते समय उसका भंडरिया की ओर देखना भी कैमरे में कैद हो गया। वहीं शिवा घटना के समय अपने घर के दरवाजे पर पर्दे की आड़ में निगरानी करता दिखाई दिया।
मोबाइल बना कंट्रोल सेंटर
सीसीटीवी के अलावा कॉल डिटेल रिकॉर्ड ने साजिश की परतें खोलीं। जांच में सामने आया कि रचिता और प्रभात के बीच प्रेम संबंध थे, जबकि प्रभात और शिवा घनिष्ठ मित्र थे।
सीडीआर से यह भी स्पष्ट हुआ कि रचिता और शिवा के बीच कभी बातचीत नहीं हुई, लेकिन रचिता–प्रभात और प्रभात–शिवा के बीच लगातार संपर्क बना हुआ था। रचिता जिस सिम का इस्तेमाल कर रही थी, वह भी प्रभात के नाम पर थी।
हत्या के दिन कॉल्स की बाढ़
घटना वाले दिन 30 अक्टूबर को जब शिवा फिरौती का पत्र डालने गया, उस आधे घंटे में रचिता और प्रभात के बीच 6–7 बार बातचीत हुई। इसके बाद जब कुशाग्र की मां ने स्कूटी को लेकर रचिता से सवाल किया, तब से लेकर परिजनों के उसके घर पहुंचने तक 10–12 कॉल्स हुईं।
फिरौती पत्र और FSL रिपोर्ट
सीसीटीवी में प्रभात द्वारा फिरौती का पत्र शिवा को सौंपते हुए भी देखा गया। पत्र की लिखावट का मिलान एफएसएल झांसी में कराया गया, जिसमें पुष्टि हुई कि फिरौती पत्र और प्रभात की लिखावट एक ही है। जिस कलम से पत्र लिखा गया था, वह भी पुलिस ने बरामद की। पत्र जिस रजिस्टर से फाड़ा गया था, उसकी भी पुष्टि एफएसएल रिपोर्ट में हुई। स्कूटी के नंबर में छेड़छाड़ की बात भी जांच में सामने आई।
15 दिन पहले कुशाग्र के घर पहुंचे थे रचिता–प्रभात
जांच में यह भी सामने आया कि घटना से 15 दिन पहले रचिता और प्रभात कुशाग्र के घर गए थे। मां सोनिया के बयान के आधार पर 14, 15 और 16 अक्टूबर की सीडीआर भी मंगाई गई, जिससे साजिश की कड़ियां और मजबूत हो गईं।
25 फोटो बनीं अहम सबूत
कोर्ट में सीसीटीवी से ली गईं 25 तस्वीरें पेश की गईं, जिन्हें कुशाग्र के चाचा सुमित कनोडिया ने पहचाना। गवाही में सुमित ने बताया कि उन्होंने रचिता को यह कहते सुना था—
“हम तीनों से बहुत बड़ी गलती हो गई है, पैसों के लालच में कुशाग्र का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी।”
चचेरे बाबा ने दर्ज कराई FIR
कुशाग्र के पिता मनीष कनोडिया सूरत में रहते हैं। बेटे के घर न लौटने पर परिवार ने तलाश शुरू की। फिरौती पत्र मिलने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और जांच की कड़ियां जुड़ती चली गईं। अंततः कुशाग्र के चचेरे बाबा संजय कनोडिया ने रायपुरवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद पूरा मामला खुलता चला गया।




