*कानपुर: दरोगा ने कारोबारी को अगवा कर मांगी फिरौती, बोला- 5 लाख नहीं दिए तो एमपी ले जाकर कर दूंगा एनकाउंटर*
डिस्टिक हेड
राहुल द्विवेदी की रिपोर्ट
“साहब… बस यही दरोगा था। पांच लोगों के साथ आया था। मेरी दुकान से उठाकर ले गया था। पूरी रात पीटा… फिर कहा – 5 लाख दे वरना तुझे मारकर यहीं खत्म कर दूंगा।”
यह शब्द हैं सचेंडी के किराना दुकानदार राम बहादुर के, जो अब भी डरे हुए हैं, लेकिन इंसाफ के लिए लड़ने की हिम्मत नहीं छोड़ी।
पूरा मामला 2 जुलाई का है।
राम बहादुर की दुकान पर दो लोग आए — सिगरेट मांगी, मना किया तो लौट गए।
आधे घंटे बाद फिर लौटे, इस बार काली गाड़ी में पांच लोग थे। खुद को मध्यप्रदेश की क्राइम ब्रांच बताया और राम बहादुर को जबरन कार में बैठाकर ले गए।
किदवई नगर के एक होटल में ले जाकर रातभर पीटा। और धमकी दी — “5 लाख दे नहीं तो तुझे एमपी ले जाकर एनकाउंटर कर दूंगा।”
राम बहादुर हाथ जोड़ते रहे, जान की भीख मांगते रहे।
किसी तरह 3 लाख देने पर मामला शांत हुआ।
रुपये देने के लिए पत्नी ने गहने गिरवी रखे, रिश्तेदारों से कर्ज लिया।
होटल के पास बुलाकर कार में रुपये लिए और पीड़ित को रास्ते में उतारकर फरार हो गए।
राम बहादुर ने इसकी शिकायत एडीसीपी वेस्ट से की।
मामला एसीपी पनकी शिखर कुमार को सौंपा गया।
जांच में चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई —
दुकानदार को अगवा करने वाला कोई गैंग नहीं, बल्कि खुद किदवई नगर थाने का दरोगा प्रभाष कुमार था।
CCTV फुटेज, गाड़ी की पहचान, और खुद पीड़ित के बयान ने दरोगा की करतूतों को सामने ला दिया।
सिर्फ अगवा ही नहीं किया, बल्कि वर्दी की आड़ में वसूली और धमकी दी।
घटनास्थल से लेकर होटल और चौकी तक हर कड़ी जुड़ी मिली।
अब मामला पुलिस कमिश्नर तक पहुंच चुका है।
ADCP लॉ एंड ऑर्डर आशुतोष कुमार ने बताया कि दरोगा की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
जल्द ही FIR दर्ज कर गिरफ्तारी और सस्पेंशन की कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई —
राम बहादुर का आरोप है कि अब वही दरोगा उन्हें लगातार धमका रहा है।
शिकायत वापस लेने का दबाव बना रहा है।
यहां तक कि 3 लाख वापस देने की पेशकश भी की, लेकिन साथ में चेतावनी —
“अगर समझौता नहीं किया तो अंजाम भुगतना पड़ेगा। पूरे परिवार को देख लूंगा।”
राम बहादुर का परिवार डरा हुआ है, लेकिन टूटने को तैयार नहीं।
जिन्होंने एक बार मौत की धमकी झेली हो, उन्हें अब चुप रहना गवारा नहीं।
टाइम्स एंड स्पेस न्यूज सवाल पूछता है:
जब वर्दी ही अपहरण करने लगे, तो भरोसा किस पर करें?




