*नदी में समाया 5 साल का प्रियांशु*
बाँदा-ब्यूरो
अल्तमश हुसैन
बांदा। बुखार से तप रहे 5 साल के मासूम को दवा दिलाने ले जा रही मां के लिए बुधवार की सुबह काल बन गई। पड़ोहरा गांव के पास चंद्रावल नदी के टूटे रपटे को पार करते वक्त फिसलकर 5 साल का प्रियांशु नदी के तेज बहाव में समा गया। मां अपनी आंखों के सामने बच्चे को डूबता देख चीखती रही, ग्रामीण कूदे लेकिन बच्चे का कहीं पता नहीं चला। जसपुरा थाना क्षेत्र के पड़ोहरा गांव निवासी संतोष पाल का 5 वर्षीय बेटा प्रियांशु पाल पिछले 4-5 दिन से बुखार से पीड़ित था। बुधवार सुबह करीब 8 बजे उसकी मां शशि पाल उसे बाइक से नहीं, पैदल ही नांदादेव दवा कराने ले जा रही थी। रास्ते में चंद्रावल नदी पर बना रपटा पड़ता है। जो पिछले 2 महीने से टूटा पड़ा है। ग्रामीणों को मजबूरी में इसी क्षतिग्रस्त रपटे की दीवार पर चढ़कर नदी पार करनी पड़ती है। बताया गया कि शशि अपने बेटे को दीवार के ऊपर से पार करा रही थी, तभी अचानक बच्चे का संतुलन बिगड़ा और वह सीधे नदी में जा गिरा। मां ने जोर-जोर से शोर मचाया। आवाज सुनकर आसपास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण दौड़े और नदी में कूदकर तलाश शुरू की। काफी देर तक कोई सुराग न मिलने पर प्रशासन को सूचना दी गई।
मौके पर एसडीएम, तहसीलदार व जसपुरा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। तहसील में मौजूद एनडीआरएफ की टीम और स्थानीय गोताखोरों को बुलाकर सर्च ऑपरेशन शुरू कराया गया। देर शाम तक बच्चे की तलाश जारी थी।प्रियांशु तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर का था। उसके पिता संतोष पाल अहमदाबाद में मजदूरी करते हैं। घटना की खबर लगते ही घर में कोहराम मच गया। दादा सुखदेव पाल और दादी दुर्गी का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम पसरा है। ग्रामीणों ने बताया कि पड़ोहरा का रपटा दो महीने से क्षतिग्रस्त है। प्रशासन ने आवागमन बंद कर रखा है, लेकिन वैकल्पिक रास्ता न होने से आमरा गांव होकर बीस किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है।इसलिए मजबूरी में लोग जान जोखिम में डालकर इसी टूटे रपटे से निकलते हैं।




