हाईकोर्ट से यूपी सरकार को राहत, 5,000 स्कूलों के मर्जर को मिली मंजूरी
फिरोज ख़ान की रिपोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार की स्कूल मर्जर नीति को वैध ठहराया, छात्रों की याचिका खारिज
लखनऊ, 7 जुलाई 2025 — उत्तर प्रदेश में 5,000 से अधिक प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के मर्जर का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार की स्कूल मर्जर नीति को वैध करार देते हुए सीतापुर के 51 छात्रों द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है।
यूपी सरकार की यह नीति राज्य के शिक्षा ढांचे को मजबूत करने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के उद्देश्य से लाई गई थी। याचिकाकर्ताओं ने मर्जर नीति को छात्रों के अधिकारों के खिलाफ बताया था, लेकिन कोर्ट ने सरकार की मंशा को उचित ठहराया और नीति में किसी प्रकार की खामी नहीं पाई।
क्या है स्कूल मर्जर नीति?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाई गई स्कूल मर्जर नीति के तहत वे सरकारी स्कूल, जिनमें छात्रों की संख्या बेहद कम है या शिक्षकों की उपलब्धता नहीं है, उन्हें पास के बड़े और संसाधन-संपन्न स्कूलों में विलय किया जाएगा। इस नीति का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना, शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करना और छात्रों को एक समृद्ध शैक्षिक वातावरण देना है।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार की नीति छात्रों के हित में है और इसका मकसद शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाना है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मर्जर के बाद छात्रों को बेहतर संसाधन और शिक्षण सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनका समग्र विकास सुनिश्चित होगा।
सरकार के पक्ष में बड़ा फैसला
सीतापुर के 51 छात्रों ने मर्जर के खिलाफ याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी। लेकिन कोर्ट ने सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के बाद अब राज्य में लगभग 5,000 स्कूलों का एक साथ विलय संभव हो सकेगा।
शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव
इस फैसले के बाद यूपी की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे शिक्षकों की तैनाती, संसाधनों की उपलब्धता और छात्रों के सीखने के माहौल में व्यापक सुधार होगा।




