सरप्लस शिक्षकों की सूची में बड़ा खेल: रसूखदारों के स्कूलों को बचाया, आम शिक्षकों पर गाज
फिरोज खान की रिपोर्ट
मुरादाबाद BSA ऑफिस में बाबुओं का ‘सेटिंग तंत्र’ उजागर, डीएम के आदेश भी ठंडे बस्ते में
मुरादाबाद – जिले में बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का ताजा मामला सामने आया है। स्कूलों में सरप्लस टीचर्स की सूची तैयार करने में अधिकारियों और बाबुओं ने ऐसा खेल खेला है कि नियम-कायदों की धज्जियां उड़ गईं। रसूखदार नेताओं और अफसरों की पत्नियों और रिश्तेदारों के स्कूलों को इस सूची से दूर रखा गया है, जबकि कुछ स्कूलों में 5 से 7 तक शिक्षकों को जबरन सरप्लस घोषित कर दिया गया।
जांच में सामने आया है कि बीएसए कार्यालय में अटैच किए गए दो बाबू – निशित अरोड़ा और ललित कुमार – इस पूरे फर्जीवाड़े के केंद्र में हैं। दोनों पर पहले भी भ्रष्टाचार और अनियमितता के गंभीर आरोप लग चुके हैं। खास बात यह है कि डीएम अनुज सिंह ने इन अटैचमेंट्स को खत्म करने का आदेश दिया था, लेकिन बीएसए विमलेश कुमार ने इन्हें अभी तक उनके मूल पद पर रिलीव नहीं किया।
सरप्लस घोषित करने में भेदभाव और डेटा की हेराफेरी
छजलैट ब्लॉक के दयानाथपुर, भगतपुर के कोटला, डिलारी के गक्खरपुर, कुंदरकी के धकिया जुम्मा और मुरादाबाद के डिडौरी जैसे कई स्कूलों में 4 से 7 शिक्षकों को कम छात्र संख्या के आधार पर सरप्लस घोषित कर दिया गया है। वहीं बेलों वाली मिलक में 150 छात्रों पर सिर्फ एक हेडमास्टर को ही सरप्लस दिखाया गया, जबकि वहां दो अन्य शिक्षक पहले से मौजूद हैं।
सूत्रों के अनुसार, जिन स्कूलों में नेताओं और अधिकारियों की पत्नियां या रिश्तेदार कार्यरत हैं, उन्हें जानबूझकर सूची से बाहर रखा गया। भगतपुर में BJP जिलाध्यक्ष आकाश पाल की पत्नी, मूंडापांडे में सपा जिलाध्यक्ष जयवीर यादव और MLC गोपाल अनजान की पत्नियां, और मुरादाबाद में पूर्व BSA गजेन्द्र सिंह की पत्नी कार्यरत हैं – लेकिन इनके स्कूलों को सरप्लस की सूची में शामिल ही नहीं किया गया।
‘सॉफ्टवेयर की तकनीकी खामी’ सिर्फ रसूखदारों के लिए ही क्यों?
विभागीय अधिकारी सारा दोष तकनीकी खामी पर मढ़ रहे हैं, लेकिन संदेह पैदा होता है कि गड़बड़ी सिर्फ उन्हीं स्कूलों में क्यों हुई जहां रसूखदारों के परिजन कार्यरत हैं। यूनियन लीडर राकेश कौशिक के स्कूल में 10 शिक्षक हैं, फिर भी कोई सरप्लस नहीं।
जांच भी बनी लीपापोती, कार्रवाई ठप
महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए थे, लेकिन जांच भी लीपापोती में बदल दी गई। बीएसए विमलेश कुमार और उनके प्रिय बाबुओं के गठजोड़ ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यदि निष्पक्ष जांच हो, तो मुरादाबाद के बीएसए कार्यालय में सरप्लस की लिस्ट को लेकर हुआ यह खेल उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े शिक्षा घोटालों में से एक बन सकता है।




