विश्व ओज़ोन दिवस पर व्याख्यान का आयोजन
विश्व ओज़ोन दिवस पर व्याख्यान का आयोजन
कानपुर नगर,दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज कानपुर के जंतु विज्ञान विभाग द्वारा विश्व ओज़ोन दिवस पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया ।व्याख्यान का मुख्य उद्देश छात्रों को जागरूक करना , और इसके क्या क्या परिणाम भविष्य में होंगे अवगत कराना भी है विभागाध्यक्ष प्रो अंजली श्रीवास्तव ने अवगत कराया कि कैसे यह दिन मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल से निकटता से जुड़ा हुआ है, जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों को कम करने के उद्देश्य से बनाई गई एक वैश्विक संधि है।
यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से प्रमुख पर्यावरणीय समस्याओं का सफलतापूर्वक समाधान कैसे किया जा सकता है।प्राचार्या प्रो वंदना निगम एवं निदेशक प्रो अर्चना वर्मा
द्वारा सभी से संकल्प दिलाया गया कि आइये विश्व ओज़ोन दिवस के अवसर पर , हम सभी मिलकर पृथ्वी के सुरक्षा कवच ओजोन परत के संरक्षण का संकल्प लें।
ओजोन परत का संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की जिम्मेदारी भी है। आइए, प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं और स्वच्छ, हरित एवं सुरक्षित पृथ्वी के निर्माण में सहभागी बनें।
विभाग की समस्त प्रवक्ताओं -प्रो सुनीता आर्या,डॉ अमिता श्रीवास्तव,डॉ रचना सिंह ,डॉ इषिता पांडेय ,डॉ शालिनी सिंह आदि ने अपने अपने वक्तव में किगाली संशोधन
समय के साथ यह पता चला कि ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों, जिन्हें हाइड्रोफ्लोरोकार्बन या एचएफसी के नाम से जाना जाता है, के स्थान पर उपयोग किए जाने वाले कई पदार्थ ओजोन परत को नुकसान नहीं पहुंचा रहे थे, बल्कि इसके बजाय अत्यंत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसों के रूप में कार्य कर रहे थे, जिनमें से कुछ कार्बन डाइऑक्साइड से हजारों गुना अधिक शक्तिशाली थे। इस नई चुनौती से निपटने के लिए, किगाली संशोधन पेश किया गया और 2019 में लागू हुआ। यह संशोधन एचएफसी के उपयोग को धीरे-धीरे कम करने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों का मानना है कि एचएफसी में सफल कमी से वर्ष 2100 तक वैश्विक तापमान में 0.4 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि को रोकने में मदद मिल सकती है, जिससे ओजोन परत की रक्षा करते हुए जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। पर भी प्रकाश डाला।८० छात्राओं ने एवं ३० प्रवक्ताओं ने सहभागिता ki
कानपुर नगर,दयानंद गर्ल्स पी जी कॉलेज कानपुर के जंतु विज्ञान विभाग द्वारा विश्व ओज़ोन दिवस पर एक व्याख्यान का आयोजन किया गया ।व्याख्यान का मुख्य उद्देश छात्रों को जागरूक करना , और इसके क्या क्या परिणाम भविष्य में होंगे अवगत कराना भी है विभागाध्यक्ष प्रो अंजली श्रीवास्तव ने अवगत कराया कि कैसे यह दिन मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल से निकटता से जुड़ा हुआ है, जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले पदार्थों को कम करने के उद्देश्य से बनाई गई एक वैश्विक संधि है।
यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से प्रमुख पर्यावरणीय समस्याओं का सफलतापूर्वक समाधान कैसे किया जा सकता है।प्राचार्या प्रो वंदना निगम एवं निदेशक प्रो अर्चना वर्मा
द्वारा सभी से संकल्प दिलाया गया कि आइये विश्व ओज़ोन दिवस के अवसर पर , हम सभी मिलकर पृथ्वी के सुरक्षा कवच ओजोन परत के संरक्षण का संकल्प लें।
ओजोन परत का संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की जिम्मेदारी भी है। आइए, प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाएं और स्वच्छ, हरित एवं सुरक्षित पृथ्वी के निर्माण में सहभागी बनें।
विभाग की समस्त प्रवक्ताओं -प्रो सुनीता आर्या,डॉ अमिता श्रीवास्तव,डॉ रचना सिंह ,डॉ इषिता पांडेय ,डॉ शालिनी सिंह आदि ने अपने अपने वक्तव में किगाली संशोधन
समय के साथ यह पता चला कि ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने वाले रसायनों, जिन्हें हाइड्रोफ्लोरोकार्बन या एचएफसी के नाम से जाना जाता है, के स्थान पर उपयोग किए जाने वाले कई पदार्थ ओजोन परत को नुकसान नहीं पहुंचा रहे थे, बल्कि इसके बजाय अत्यंत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसों के रूप में कार्य कर रहे थे, जिनमें से कुछ कार्बन डाइऑक्साइड से हजारों गुना अधिक शक्तिशाली थे। इस नई चुनौती से निपटने के लिए, किगाली संशोधन पेश किया गया और 2019 में लागू हुआ। यह संशोधन एचएफसी के उपयोग को धीरे-धीरे कम करने पर केंद्रित है। विशेषज्ञों का मानना है कि एचएफसी में सफल कमी से वर्ष 2100 तक वैश्विक तापमान में 0.4 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि को रोकने में मदद मिल सकती है, जिससे ओजोन परत की रक्षा करते हुए जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। पर भी प्रकाश डाला।८० छात्राओं ने एवं ३० प्रवक्ताओं ने सहभागिता ki




