*सुबह 4 बजे तक चला मंथन’, ईरान-सऊदी और UAE जैसे धुर विरोधियों को भारत ने BRICS के संयुक्त बयान पर राजी किया*
*ईरान, सऊदी अरब और UAE में बन गई बात, नई दिल्ली घोषणापत्र का निकला आम सहमति वाला समाधान*
*🇮🇳🌍 ब्रिक्स घोषणा-पत्र — बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की कूटनीतिक पहल*
* *भारत की कूटनीतिक पहल:* ग्लोबल साउथ को वैश्विक निर्णयों में अधिक प्रभावी और निर्णायक आवाज दिलाने पर जोर।
* *बहुध्रुवीय विश्व:* अधिक संतुलित, समावेशी और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था का समर्थन।
* *स्थानीय मुद्राएं:* व्यापार और निवेश में स्थानीय मुद्राओं के अधिक इस्तेमाल को बढ़ावा।
* *सीमा-पार भुगतान:* तेज, सस्ता, सुरक्षित और आपस में जुड़े क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम विकसित करने पर जोर।
* *डिजिटल भुगतान:* राष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों की कनेक्टिविटी और CBDC के माध्यम से सीमा-पार भुगतान की संभावनाओं पर जोर।
* *वैश्विक वित्तीय सुधार:* IMF और विश्व बैंक में अधिक प्रतिनिधित्व, पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए सुधार की मांग।
* *आर्थिक सहयोग:* ऊर्जा, कृषि, खाद्य सुरक्षा, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला में सहयोग मजबूत करने पर जोर।
* *शांति और सुरक्षा:* संवाद, कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान पर जोर।
* *साझा BRICS मुद्रा नहीं:* फिलहाल लक्ष्य डॉलर को तुरंत हटाना नहीं, बल्कि विकल्प बढ़ाना और डॉलर पर निर्भरता कम करना है।
*BRICS घोषणा-पत्र = ग्लोबल साउथ + बहुध्रुवीय विश्व + स्थानीय मुद्राएं + डिजिटल भुगतान + वैश्विक वित्तीय सुधार 🇮🇳🌍*
*बातचीत के दौरान कई विवादित मुद्दों पर मतभेद सामने आए। भारत ने अलग-अलग राय रखने वाले सदस्यों के बीच आम सहमति बनाने के लिए लगातार बातचीत की। यह कामयाबी इसलिए भी खास है क्योंकि ईरान, सऊदी अरब और यूएई एक ही मंच का हिस्सा हैं, जबकि कई क्षेत्रीय और भू-राजनीतिक मुद्दों पर उनके बीच गहरे मतभेद और अलग-अलग राय रही है।*
* भारत ने अलग-अलग राय रखने वाले सदस्यों के बीच तालमेल बिठाने और ऐसी आम सहमति बनाने की कोशिश की जिसे सभी सदस्य स्वीकार कर सकें। कई घंटों की बातचीत और विचार-विमर्श के बाद संयुक्त बयान पर सहमति बनी, जिससे पता चलता है कि चर्चा कितनी जटिल थी।
*यह कामयाबी तब मिली जब नेता 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली में जुटे थे। भारत अपनी अध्यक्षता का इस्तेमाल इस विविध समूह के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए करना चाहता था। सफल बातचीत ने ऐसे मंच को संभालने की चुनौती को भी उजागर किया, जिसमें अब काफी अलग भू-राजनीतिक स्थिति वाले देश एक साथ आते हैं।*




