क्रोमैटोग्राफी: समकालीन तकनीकें एवं अनुप्रयोग” पर व्याख्यान का आयोजन
कानपुर नगर, रसायन विज्ञान विभाग, दयानन्द गर्ल्स पी.जी. कॉलेज, कानपुर एवं आई क्यू ए सी के तत्वावधान मेंक्रोमैटोग्राफी: समकालीन तकनीकें एवं अनुप्रयोग पर व्याख्यान, विशिष्ट वक्ता: प्रो. अलका टंगड़ी , रसायन विज्ञान विभाग, ब्रह्मानन्द कॉलेज, कानपुर द्वारा स्थान: कक्ष संख्या 16 में स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं के रसायन विज्ञान की छात्राओं के लिए एक ज्ञानवर्धक एवं शैक्षणिक व्याख्यान का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को क्रोमैटोग्राफी के मूलभूत सिद्धांतों के साथ-साथ आधुनिक एवं उन्नत क्रोमैटोग्राफिक तकनीकों तथा उनके विभिन्न क्षेत्रों में अनुप्रयोगों से परिचित कराना था। यह व्याख्यान विशेष रूप से विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम में पढ़ाए जाने वाले सैद्धांतिक ज्ञान को आधुनिक प्रयोगशाला एवं अनुसंधान की व्यावहारिक आवश्यकताओं से जोड़ने की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी रहा।
अपने व्याख्यान में प्रो. अलका टांगड़ी ने सर्वप्रथम क्रोमैटोग्राफी के मूल सिद्धांत को सरल एवं प्रभावी ढंग से समझाया। उन्होंने बताया कि क्रोमैटोग्राफी विभिन्न पदार्थों को उनके स्थिर प्रावस्था (Stationary Phase) तथा गतिशील प्रावस्था (Mobile Phase) के बीच अलग-अलग वितरण के आधार पर पृथक करने की महत्वपूर्ण विश्लेषणात्मक तकनीक है।
उन्होंने विद्यार्थियों को विभिन्न पारंपरिक एवं आधुनिक क्रोमैटोग्राफिक तकनीकों जैसे पेपर क्रोमैटोग्राफी, थिन लेयर क्रोमैटोग्राफी (TLC), कॉलम क्रोमैटोग्राफी, गैस क्रोमैटोग्राफी (GC) तथा हाई परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी (HPLC) के सिद्धांत, कार्यविधि एवं उपयोगिता के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
आपने अवगत कराया कि
रासायनिक उद्योग में क्रोमैटोग्राफी पर्यावरण अनुसंधान प्रयोगशालाएँ अपशिष्ट तेल में पीसीबी जैसे विषाक्त पदार्थों की सूक्ष्म मात्रा का पता लगाने के लिए क्रोमैटोग्राफी तकनीकों का व्यापक रूप से उपयोग करती हैं। भूजल में डीडीटी जैसे कीटनाशकों की खोज के लिए भी ऐसी तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। पर्यावरण संरक्षण एजेंसी द्वारा पीने के पानी की गुणवत्ता की जाँच और वायु की गुणवत्ता की निगरानी के लिए भी क्रोमैटोग्राफी तकनीक का उपयोग किया जाता है। दवा कंपनियाँ बड़ी मात्रा में अत्यधिक शुद्ध उत्पादों के प्रसंस्करण और निकाले गए पदार्थों में सूक्ष्म संदूषकों की जाँच के लिए क्रोमैटोग्राफी का उपयोग करती हैं।तेलों और कीटनाशकों में विषाक्त संदूषकों (जिनमें सबसे उल्लेखनीय पॉलीक्लोरीनेटेड बाइफेनिल हैं, जिन्हें अक्सर पीसीबी के रूप में संक्षिप्त किया जाता है) की उपस्थिति का निर्धारण जीसी और एचपीएलसी जैसी विशेष क्रोमैटोग्राफिक तकनीकों की मदद से किया जा सकता है।
व्याख्यान में ३० छात्राओं ने प्रतिभाग किया । कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यक्रम की समन्वयक प्रो रचना प्रकाश ,आयोजन सचिव डॉ अर्चना दीक्षित, आयोजक सदस्य डॉ प्रियदर्शनी निरंजन एवं डॉ शैल कुमारी का विशेष सहयोग रहा।




