कक्षा 8 की नई इतिहास पुस्तक में बड़ा बदलाव,
बाबर और औरंगज़ेब पर बदला नजरिया।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा 8 की नई इतिहास पुस्तक”हमारा अतीत-III में मुगल शासकों बाबर और औरंगज़ेब के वर्णन को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। पुस्तक में बाबर को “रक्तपिपासु”तथा औरंगज़ेब को “मंदिर तोड़ने वाला” बताया गया है। इसके साथ ही मुगल शासन के दौरान हुए धार्मिक संघर्षों, मंदिरों के विध्वंस और राजनीतिक घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।
नई पुस्तक में पहले की तुलना में मुगल साम्राज्य के गौरव पर अपेक्षाकृत कम जोर दिया गया है, जबकि उनके शासनकाल से जुड़े विवादित और ऐतिहासिक रूप से चर्चित पहलुओं को अधिक स्थान दिया गया है। शिक्षा जगत में इसे इतिहास की प्रस्तुति में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन माना जा रहा है।
केंद्र सरकार का कहना है कि नई पुस्तकों का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास का व्यापक और संतुलित दृष्टिकोण उपलब्ध कराना है, ताकि वे विभिन्न ऐतिहासिक स्रोतों और घटनाओं को समझते हुए अपनी स्वतंत्र सोच विकसित कर सकें। वहीं, इस बदलाव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू नई शिक्षा नीति और पाठ्यक्रम सुधारों का हिस्सा भी माना जा रहा है।
हालांकि, इस विषय पर मतभेद भी सामने आए हैं। कुछ इतिहासकारों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इतिहास लेखन में प्रयुक्त भाषा तथ्यपरक, स्रोत-आधारित और संतुलित होनी चाहिए, जबकि अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के विवादित कार्यों और निर्णयों का उल्लेख भी विद्यार्थियों के समक्ष स्पष्ट रूप से रखा जाना आवश्यक है।
कुल मिलाकर, कक्षा 8 की नई इतिहास पुस्तक ने इतिहास लेखन, पाठ्यक्रम सुधार और भारतीय इतिहास की प्रस्तुति को लेकर एक नई बहस को जन्म दिया है। आने वाले समय में इस विषय पर अकादमिक, सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा जारी रहने की संभावना है।




