*परमट के प्राथमिक विद्यालय में सपा-भाजपा भिड़ीं, नेताओं की नारेबाजी और चप्पलबाजी के बीच कोनों में दुबके रहे छात्र*
अक्षत श्रीवास्तव
कानपुर के परमट स्थित प्राथमिक विद्यालय में बीते बुधवार को शिक्षा का मंदिर सियासी अखाड़े में तब्दील हो गया। स्कूल के शिलान्यास को लेकर सपा और भाजपा नेताओं के बीच ऐसा टकराव हुआ कि मासूम बच्चों का भविष्य और सुरक्षा दोनों सवालों के घेरे में आ गए। गाली-गलौज, धक्कामुक्की, नारेबाजी और चप्पल दिखाने की घटना के बीच कक्षा में बैठे बच्चे डर से सहम गए। कोई दरवाजे के पीछे छिप गया तो कोई कोने में दुबककर रोता नजर आया। जिस स्कूल में बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी जानी थी, वहां राजनीति की लड़ाई ने शिक्षा और संवेदनाओं दोनों को शर्मसार कर दिया।विवाद उस समय शुरू हुआ जब 15 मई को प्रस्तावित शिलान्यास कार्यक्रम से पहले सपा समर्थकों द्वारा स्कूल परिसर में सफाई कराई जा रही थी। आरोप है कि भाजपा नेता सुरेश अवस्थी समर्थकों के साथ पहुंचे और काम रुकवाकर मजदूरों को भगा दिया। सूचना मिलने पर आर्यनगर विधायक अमिताभ बाजपेई समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे, जिसके बाद माहौल गर्मा गया। देखते ही देखते दोनों दलों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए।नारेबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और धक्कामुक्की के बीच भाजपा पार्षद विकास जायसवाल द्वारा विधायक को चप्पल दिखाने की घटना ने विवाद को और भड़का दिया। विधायक ने हाथ जोड़ते हुए कहा कि “हम गांधीवादी लोग हैं, इस स्तर पर नहीं उतरेंगे”, लेकिन तब तक माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो चुका था।सबसे दर्दनाक तस्वीर स्कूल के अंदर देखने को मिली। बाहर नेता एक-दूसरे पर राजनीतिक वार कर रहे थे और अंदर मासूम बच्चे डर के साए में बैठे सब कुछ देख रहे थे। बच्चों ने नेताओं को अपशब्द कहते, धमकाते और आक्रोश में चप्पल लहराते देखा तो वह सहम गए। कई बच्चे कक्षा के कोनों में जाकर बैठ गए। बाद में पुलिस ने बच्चों को बाहर निकालकर किसी तरह शांत कराया और घर भेजा। सवाल यह है कि क्या राजनीति अब इतनी संवेदनहीन हो चुकी है कि नेताओं को स्कूल में बैठे गरीब बच्चों का भविष्य और मानसिक स्थिति भी दिखाई नहीं देती?विद्यालय पहले से जर्जर हालत में है। बिजली कनेक्शन कटा हुआ है और संसाधनों की भारी कमी है। ऐसे में उम्मीद थी कि शिलान्यास से बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित माहौल मिलेगा, लेकिन विकास की जगह यहां राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई छिड़ गई। हालात इतने बिगड़ गए कि ग्वालटोली, कर्नलगंज, नवाबगंज और कोहना थानों की पुलिस को मौके पर तैनात करना पड़ा। करीब ढाई घंटे तक स्कूल परिसर पुलिस छावनी बना रहा।




