*जाम ने फिर ली एक जान,एंबुलेंस में तड़पते रहे बुजुर्ग फजलगंज से हैलट तक 38 मिनट की जंग हार गए बुजुर्ग*,
अक्षत श्रीवास्तव की रिपोर्ट
*लंदन में बेटे को भेजना पड़ा पिता का डेथ सर्टिफिकेट*
कानपुर की बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था ने एक बार फिर जिंदगी छीन ली। साकेत नगर सब्जी मंडी निवासी 74 वर्षीय रामचंद्र शुक्ला को बुधवार दोपहर अचानक दिल का दौरा पड़ा। परिजन उन्हें निजी एंबुलेंस से कार्डियोलॉजी अस्पताल लेकर भागे, लेकिन फजलगंज, मरियमपुर और हैलट पुल पर लगे भीषण जाम ने उनकी सांसों की रफ्तार रोक दी। एंबुलेंस सायरन बजाती रही, पर सड़क पर पसरे अव्यवस्था के जंगल में रास्ता नहीं मिला। करीब 38 मिनट तक जाम से जूझने के बाद जब परिजन अस्पताल पहुंचे तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक परिवार की दुनिया उजड़ गई और शहर का ट्रैफिक सिस्टम फिर कटघरे में खड़ा हो गया।दामाद अनिल त्रिपाठी के मुताबिक दोपहर करीब 12 बजे रामचंद्र शुक्ला की हालत बिगड़ी थी। 12:29 बजे एंबुलेंस घर से निकली, लेकिन गोविंदपुरी पुल पार करते ही फजलगंज चौराहे पर वाहनों की लंबी कतार में फंस गई। किसी तरह आगे बढ़े तो मरियमपुर चौराहे पर फिर वही हाल मिला। ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड सिर्फ औपचारिकता निभाते नजर आए, जबकि एंबुलेंस में एक जिंदगी हर पल मौत से लड़ रही थी। लाजपत नगर रोड पर स्कूल के सामने तीसरी बार जाम ने रास्ता रोक लिया। परिजन मदद की गुहार लगाते रहे, मगर सिस्टम की संवेदनहीनता सायरन की आवाज पर भारी पड़ गई। करीब 1:10 बजे कार्डियोलॉजी पहुंचने पर डॉक्टरों ने बुजुर्ग को मृत घोषित कर दिया।
इस दर्दनाक घटना ने परिवार को भीतर तक तोड़ दिया। लंदन में साफ्टवेयर इंजीनियर बेटे अभिषेक शुक्ला को जब पिता की मौत की खबर मिली तो वह वीडियो कॉल पर बेसुध मां को संभालता रहा। भारत आने के लिए उसे छुट्टी और औपचारिकताओं में पिता का डेथ सर्टिफिकेट तक भेजना पड़ा। गुरुवार सुबह वह दिल्ली पहुंचा, जबकि दूसरा बेटा नोएडा से कानपुर आ रहा है। दोनों बेटों के पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार होगा।शहर में जाम के कारण मौत का यह पहला मामला नहीं है। पिछले महीनों में भी कई लोग ट्रैफिक अव्यवस्था की भेंट चढ़ चुके हैं। कभी मेट्रो निर्माण, कभी वीआईपी मूवमेंट तो कभी अवैध अतिक्रमण और बेतरतीब ट्रैफिक, हर बार वजह बदलती रही, लेकिन मौत का चेहरा वही रहा। सवाल यह है कि आखिर कब तक कानपुर की सड़कों पर एंबुलेंसें जाम में फंसकर दम तोड़ती रहेंगी और जिम्मेदार विभाग सिर्फ सड़क किनारे खड़े होकर औपचारिकता निभाते रहेंगे?




