*स्मार्ट स्कूल के शिलान्यास पर सियासी संग्राम, आर्यनगर में समाजवादी पार्टी और भाजपा कार्यकर्ता भिड़े*
*परमट स्कूल बना राजनीतिक अखाड़ा, सपा विधायक अमिताभ बाजपेई धरने पर बैठे, बीजेपी नेताओं ने की जमकर नारेबाजी और हंगामा*
कानपुर के आर्यनगर विधानसभा क्षेत्र में स्मार्ट स्कूल के शिलान्यास को लेकर बुधवार को ऐसा राजनीतिक घमासान छिड़ा कि परमट स्थित प्राथमिक विद्यालय परिसर कुछ देर के लिए सियासी अखाड़े में तब्दील हो गया। समाजवादी पार्टी और बीजेपी के नेता व कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक, जोरदार नारेबाजी और शिलान्यास के श्रेय को लेकर जमकर हंगामा हुआ। हालात इतने बिगड़ गए कि मौके पर भारी पुलिस बल बुलाना पड़ा और सपा विधायक अमिताभ बाजपेई धरने पर बैठ गए।पूरा विवाद परमट स्थित प्राथमिक विद्यालय के पुनर्निर्माण और उसे स्मार्ट स्कूल बनाए जाने को लेकर शुरू हुआ। बीजेपी नेता सुरेश अवस्थी ने पहले ही 14 मई को सांसद रमेश अवस्थी के हाथों शिलान्यास कार्यक्रम की घोषणा करते हुए क्षेत्र में बड़े-बड़े बैनर और पोस्टर लगवा दिए थे। इसके जवाब में सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने 15 मई को शिलान्यास कार्यक्रम कराने की घोषणा करते हुए अपने पोस्टर लगवा दिए। देखते ही देखते विकास कार्य का मुद्दा राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गया।बुधवार सुबह विधायक अमिताभ बाजपेई समर्थकों के साथ स्कूल पहुंचे और शिलापट्ट लगाने की तैयारी शुरू करा दी। इसी दौरान बीजेपी नेता सुरेश अवस्थी अपने समर्थकों संग मौके पर पहुंच गए और कार्यक्रम पर आपत्ति जताने लगे। दोनों नेताओं के बीच पहले बहस हुई, फिर कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाल लिया। “सपा जिंदाबाद” और “भाजपा जिंदाबाद” के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। माहौल इतना गरमा गया कि दोनों पक्ष एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए और धक्का-मुक्की जैसी स्थिति बन गई।हंगामे की सूचना मिलते ही बीजेपी जिलाध्यक्ष, पार्षद और बड़ी संख्या में दोनों दलों के समर्थक मौके पर पहुंच गए। राजनीतिक तनाव बढ़ता देख विधायक अमिताभ बाजपेई स्कूल परिसर में ही धरने पर बैठ गए और बीजेपी पर विकास कार्यों का श्रेय हथियाने का आरोप लगाया। वहीं बीजेपी नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि सांसद निधि और केंद्र सरकार की योजनाओं से होने वाले कार्य का राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।
स्थिति बिगड़ती देख ग्वालटोली पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने मोर्चा संभाला। पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया और काफी मशक्कत के बाद मामला शांत कराया। कई घंटे तक चले इस सियासी ड्रामे के कारण स्कूल परिसर और आसपास का इलाका छावनी में तब्दील रहा। स्थानीय लोगों में भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा बनी रही कि बच्चों की शिक्षा और विकास के नाम पर शुरू हुआ स्मार्ट स्कूल प्रोजेक्ट अब राजनीतिक वर्चस्व की जंग में फंसता जा रहा है।




