*ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी, जिस पर डिफेंस मिनिस्ट्री को नाज, पूरी दुनिया में तारीफ, लेकिन पाकिस्तान कांप रहा*
*ऑपरेशन सिंदूर आतंकवाद खत्म करने के मोदी सरकार के दृढ़ संकल्प का प्रतीक*
* ऑपरेशन ‘सिंदूर’ से सहमा आतंकी नेटवर्क, दुनिया ने देखी भारतीय सेना की ताकत।
* भारत ने पिछले साल 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।
* इस ऑपरेशन का लक्ष्य पाकिस्तान के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में स्थित आतंकी ढांचे को निशाना बनाना था।
*आतंकवादियों ने हमारे देशवासियों का धर्म पूछकर मारा, मगर हम लोगों ने किसी का धर्म देखकर नहीं, बल्कि हमने उनके कर्म देखकर मारा है.*
* भारत ने आतंकवादियों के हमले का जवाब देते समय उनके धर्म को नहीं, बल्कि उनके कर्मों को देखा मारा.
*’ऑपरेशन सिंदूर’: यह नाम 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों के सम्मान में रखा गया, जहां भारतीय महिलाओं के सुहाग (सिंदूर) को उजाड़ा गया था, जो भारत की एक दृढ़ प्रतिक्रिया का संदेश है।*
*ऑपरेशन सिंदूर से ईरान जंग तक, जानें कैसे शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर ने ट्रंप का एहसान चुकाया*
● पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच हुए संघर्षविराम में पाकिस्तान की भूमिका अहम बताई जा रही है।
● असल बात यह है कि पाकिस्तान ने इस संघर्षविराम के जरिए ट्रंप का ऑपरेशन सिंदूर वाला कर्ज उतारा है।
● यह सही भी बात है, क्योंकि ट्रंप लगातार ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत विरोधी बयानबाजी करते रहे हैं।
● भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था।
● इस ऑपरेशन के पहले चरण में भारतीय सेना ने पाकिस्तान में प्रमुख आतंकवादी अड्डों लश्कर-ए-तैयबा के हेडक्वार्टर मुरीदके और जैश-ए-मोहम्मद के हेडक्वार्टर बहावलपुर समेत कई दूसरे ठिकानों को निशाना बनाया था।
● पूरी दुनिया ने सबूत देखे कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को कितना नुकसान हुआ।
● उसकी एयर डिफेंस की पोल खुल गई और कई विमान तो बिना उड़ान भरे जमीन पर मलबे में बदल गए।
● इसके बावजूद अमेरिका का ट्रंप प्रशासन भारत के खिलाफ दुष्प्रचार में शामिल हुआ।
● पहले अमेरिकी अधिकारियों की ओर से कई राफेल गिराने की भ्रामक खबर फैलाई गई।
● बाद में ट्रंप ने खुलेआम कहना शुरू कर दिया कि उन्होंने ही भारत और पाकिस्तान में युद्धविराम कराया है।
● ट्रंप को पहले अनुमान था कि ईरान एक से दो हफ्तों में ही घुटने टेक देगा, हालांकि यह गलत साबित हुआ। ईरान ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया और मध्य पूर्व में न सिर्फ अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए, बल्कि उसके सहयोगी देशों के प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया। इससे अमेरिका के सहयोगी देश बिलबिलाने लगे।
● दबाव बढ़ता देख, ट्रंप ने ईरान को धमकी देना शुरू किया, लेकिन यह भी बेअसर साबित हुआ। थक हारकर ट्रंप को पाकिस्तान की मदद लेनी पड़ी, क्योंकि वह ईरान का करीबी है और एक मुस्लिम राष्ट्र भी, जिसकी अमेरिका से भी नजदीकी है।
● दरअसल पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम में कोई मध्यस्थता नहीं की है, बल्कि उसने एक संदेशवाहक के रूप में काम किया है। वह अमेरिका के संदेश ईरान तक और ईरान के संदेश अमेरिका तक पहुंचाने के लिए डाकिया बना।
*मई 2025 में, भारतीय वायु सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान रूसी निर्मित S-400 ‘सुदर्शन’ मिसाइल सिस्टम का उपयोग करके एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। इस ऑपरेशन में, लगभग 300 से 314 किलोमीटर की अभूतपूर्व दूरी से पाकिस्तानी वायु सेना के एक विमान को मार गिराया गया, जो सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (SAM) द्वारा दुनिया का सबसे लंबा किल माना जा रहा है।*




