*रामलीला मैदान बना ‘अवैध डंपिंग यार्ड’, कमेटी की चुप्पी से ब्रह्म नगर के निवासियों में भारी आक्रोश*
नितेश प्रताप सिंह (ब्यूरो इटावा)
इटावा। शहर का ऐतिहासिक रामलीला मैदान इन दिनों अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान खोता नजर आ रहा है। श्रद्धा और उल्लास का केंद्र रहने वाला यह मैदान अब पूरी तरह से बिल्डिंग मटेरियल विक्रेताओं के कब्जे में है। मैदान के चारों ओर फैला मोहरम, बालू और गिट्टी के ढेर न केवल स्वरूप बिगाड़ रहे हैं, बल्कि क्षेत्रीय नागरिकों के लिए मुसीबत का सबब बन गए हैं।
धूल और गंदगी से ब्रह्म नगर बेहाल मैदान के समीप स्थित ब्रह्म नगर के निवासियों का जीना मुहाल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है, कि दिन भर उड़ने वाली बालू और धूल के कणों के कारण घरों में रहना मुश्किल है। बुजुर्गों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है, और बच्चों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है। सड़क पर फैली गिट्टी के कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालक फिसलकर चोटिल हो रहे हैं।
कमेटी की भूमिका पर गहराया संदेह
हैरानी की बात यह है कि इस पूरे अतिक्रमण पर रामलीला कमेटी के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। जानकारों का कहना है, कि बिना सांठगांठ के सार्वजनिक मैदान का इस तरह व्यावसायिक उपयोग संभव नहीं है। सोशल मीडिया और गलियारों में चर्चा है, कि क्या कमेटी के कुछ प्रभावशाली सदस्यों की संलिप्तता के कारण ही इन दुकानदारों के हौसले बुलंद हैं?
“सालों से यह मैदान रामलीला के लिए सुरक्षित था, लेकिन अब यहाँ सिर्फ ट्रक और निर्माण सामग्री दिखती है। बार-बार शिकायत के बावजूद कमेटी कोई कदम नहीं उठा रही है।”
निवासी, ब्रह्म नगर
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
क्षेत्रीय जनता अब इस मामले में जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की उम्मीद कर रही है। लोगों का सवाल है, कि जिस मैदान को धार्मिक कार्यों के लिए आरक्षित होना चाहिए, उसे ‘कमर्शियल गोडाउन’ कैसे बनने दिया गया।
मुख्य बिंदु जो जांच का विषय हैं:
क्या बिल्डिंग मटेरियल दुकानदारों से कोई अवैध वसूली की जा रही है?
रामलीला कमेटी ने अब तक इन दुकानदारों को नोटिस क्यों नहीं दिया?
प्रदूषण और अतिक्रमण के खिलाफ नगर पालिका खामोश क्यों है?
अगर जल्द ही इस कब्जे को नहीं हटाया गया, तो ब्रह्म नगर के निवासी आंदोलन की राह पकड़ने को मजबूर होंगे।




