मोबाइल की लत युवाओं के लिए खतरा, अब काबिलियत का पैमाना बनेगा डीक्यू : डीएम
– सीएसजेएमयू में ‘फाइटिंग डिजिटल एडिक्शन’ कार्यक्रम, डिजिटल अनुशासन अपनाने का आह्वान
कानपुर नगर, मोबाइल और इंटरनेट का अनियंत्रित उपयोग युवाओं की एकाग्रता, मानसिक संतुलन और उत्पादकता के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में आयोजित “फाइटिंग डिजिटल एडिक्शन” कार्यक्रम में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि डिजिटल युग में तकनीक का संतुलित उपयोग ही सफलता की कुंजी है और आने वाले समय में व्यक्ति की काबिलियत उसके डिजिटल व्यवहार से भी आंकी जाएगी।
उन्होंने कहा कि आज का समय अटेंशन इकॉनमी का है, जहां बड़ी तकनीकी कंपनियां लोगों का ध्यान अपने प्लेटफॉर्म पर बनाए रखने के लिए मनोविज्ञान और तकनीक दोनों का इस्तेमाल कर रही हैं। भारत में लगभग 97 करोड़ इंटरनेट/मोबाइल कनेक्शन होने के कारण मोबाइल फोन इस व्यवस्था का सबसे बड़ा माध्यम बन गया है। बताया कि मोबाइल एप्लिकेशन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इस प्रकार डिजाइन किए जाते हैं कि उपयोगकर्ता बार-बार फोन खोलें। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक जेम्स ओल्ड्स और पीटर मिल्नर ने पाया था कि मस्तिष्क में डोपामिन रिलीज होने पर चूहा भोजन और पानी छोड़कर बार-बार बटन दबाता रहा। उन्होंने कहा कि आज डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इसी सिद्धांत पर उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक जोड़े रखने का प्रयास करते हैं। युवाओं से कहा कि तकनीक से दूरी बनाना समाधान नहीं है, बल्कि डिजिटल अनुशासन विकसित करना आवश्यक है। इसी क्रम में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट सृजन श्रीवास्तव ने कहा कि डिजिटल लत केवल तकनीकी नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक समस्या भी है। इससे निपटने के लिए जागरूकता, आत्मनियंत्रण और परिवार तथा शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इस पहल को तीन स्तरीय हस्तक्षेप मॉडल के रूप में लागू किया जाएगा, जिसमें छात्रों में डिजिटल अनुशासन विकसित करने, शिक्षकों और काउंसलरों को शुरुआती संकेत पहचानने का प्रशिक्षण देने तथा अभिभावकों को संतुलित डिजिटल वातावरण बनाने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया जाएगा।
मोबाइल की लत युवाओं के लिए खतरा, अब काबिलियत का पैमाना बनेगा डीक्यू : डीएम
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