*लेडीज डॉन नटवरलाल कई फर्जी नामो का मायाजाल?;*
* *कानपुर डिस्ट्रिक हेड राहुल द्विवेदी*
*
नकली अधिवक्ता बनकर प्रशासन को करें है,बेहाल?
1,चोरी मे अलीशा?
2,फर्जी वकालत मे फिरदौस परवीन?
3,कानपुर नगर के दर्ज मुकदमे में पूनम यादव?
4,कानपुर नगर थाना नजीराबाद के दहे व्यापार के दर्ज मुकदमे मे आक्सा अंसारी?
5,फर्जी तरीके से दो,नामो के संशोधन में अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन?
उन्नाव पुलिस अधीक्षक साहब इन पांच नामो के बदले जाने का क्या है
जवाब?
खाकी खामोश क्यों?
साख पर लगा बट्टा?
संगीन धाराओं का उल्लंघन?: फिर भी महिला गिरफ्त से दूर?:
उन्नाव पुलिस अधीक्षक अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन द्वारा प्रयोग में लाई दोनों महिलाओं की आईडी का क्या संज्ञान लेते है?
उन्नाव पुलिस अधीक्षक अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन द्वारा प्रयोग किए दोनो रजिस्ट्रेशन,1364/2020 और
UP02898/2020 का संज्ञान लेकर शातिर महिला पर क्या अभियोग पंजीकृत होता है?
उन्नाव कोर्ट में फर्जीवाड़े की वकालत!उन्नाव। प्रदेश में जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत बड़े-बड़े सूरमाओं के अवैध साम्राज्य ध्वस्त किए जा रहे हैं, वहीं उन्नाव पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। मामला है कथित अधिवक्ता अलीशा अंसारी का, जिस पर दोहरी पहचान और फर्जी दस्तावेजों के सहारे न्यायपालिका की आँखों में धूल झोंकने का आरोप है। सवाल यह है कि जब आजम खान को दोहरे दस्तावेजों के लिए जेल हो सकती है, तो अलीशा अंसारी पर ‘मेहरबानी’ क्यों?दो चेहरों वाली ‘वकील’: अलीशा अंसारी या फिरदौस परवीन?कानून की किताब स्पष्ट कहती है—’कानून के ऊपर कोई नहीं’। लेकिन उन्नाव में यह जुमला महज कागजी नजर आ रहा है। आरोपी महिला दो अलग-अलग पहचान (अलीशा अंसारी और फिरदौस परवीन) के साथ बेखौफ घूम रही है।दोहरा रजिस्ट्रेशन: बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दो अलग-अलग रजिस्ट्रेशन नंबरों (1364/2020 और UP02898/2020) का प्रयोग किया जा रहा है।फर्जी मोहरों का खेल: सीजेएम कोर्ट में दाखिल वकालतनामों में कथित तौर पर फर्जी मोहरों का इस्तेमाल किया गया है, जो सीधे तौर पर न्यायपालिका की अवमानना और धोखाधड़ी है।आजम खान को जेल, तो अलीशा को ‘कवच’ क्यों?बीते 17 नवंबर 2025 को रामपुर की अदालत ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दोहरे पैन कार्ड और जाली दस्तावेजों के मामले में 7 साल की सजा सुनाई। अपराध की प्रकृति एक समान है—फर्जी दस्तावेज और दोहरी पहचान।
बड़ा सवाल: एक ही अपराध के लिए कानून के दो पैमाने क्यों? क्या सत्ता का संरक्षण इस कथित महिला वकील के लिए ढाल बना हुआ है? उन्नाव पुलिस अधीक्षक की चुप्पी इस संदेह को और गहरा कर रही है कि क्या ‘खाकी’आज भी प्रभाव और दबाव के आगे नतमस्तक है?
संगीन धाराओं का उल्लंघन, फिर भी गिरफ्त से दूर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा,420, 467, 468 के तहत यह कृत्य 10 साल तक की सजा का प्रावधान रखता है। बार काउंसिल के नियम स्पष्ट हैं कि एक अधिवक्ता केवल एक ही रजिस्ट्रेशन पर कार्य कर सकता है। इसके बावजूद, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर धन उगाही और झूठे मुकदमे दर्ज कराने वाली इस महिला पर शिकंजा न कसना प्रशासन की नीयत पर सवाल उठाता है।साख पर लगा बट्टा यह मामला सिर्फ एक महिला की धोखाधड़ी का नहीं है, बल्कि उस कानूनी व्यवस्था की साख का है




