गैस संकट: होटलों पर रोकी गई कॉमर्शियल सिलिंडर की सप्लाई, 20 हजार उपभोक्ता प्रभावित
डिस्ट्रिक हेड: राहुल द्विवेदी
कानपुर। शहर में गैस संकट गहराने लगा है। केंद्र सरकार के नए निर्देशों के बाद कॉमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं को एलपीजी सिलिंडर की आपूर्ति पर अस्थायी रोक लगा दी गई है। इसका सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों और बड़े खानपान प्रतिष्ठानों पर पड़ने लगा है। जिले में करीब 20 हजार वाणिज्यिक एलपीजी उपभोक्ता हैं, जो प्रतिदिन लगभग आठ से नौ हजार कॉमर्शियल सिलिंडरों की खपत करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय संकट का असर
बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस आपूर्ति बाधित हुई है। कई देशों से एलपीजी आयात रुकने से निजी वितरकों का स्टॉक तेजी से घट गया है। आमतौर पर निजी डीलरों के पास केवल दो से तीन दिन का भंडार ही रहता है और मौजूदा स्थिति में उनका स्टॉक लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है।
आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता
सरकारी तेल कंपनियों के पास फिलहाल आठ से दस दिन का भंडार बताया जा रहा है। उपलब्ध गैस को अब आवश्यक सेवाओं के लिए प्राथमिकता दी जा रही है। एलपीजी वितरक संघ के संरक्षक भारतीश मिश्रा के मुताबिक पहले अस्पतालों, छात्रावासों और बड़े संस्थानों को सिलिंडर उपलब्ध कराए जाएंगे।
घरेलू उपभोक्ताओं को दी प्राथमिकता
सोमवार को केंद्र सरकार ने निर्देश जारी कर घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी आपूर्ति को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। इसी के तहत फिलहाल कॉमर्शियल और औद्योगिक उपभोक्ताओं की सप्लाई रोक दी गई है।
इस फैसले से शहर के होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और बड़े किचन संचालकों में चिंता बढ़ गई है। कई कारोबारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सप्लाई बहाल नहीं हुई तो उन्हें कारोबार सीमित करना पड़ सकता है।
कारोबारियों की बढ़ी चिंता
कृष्णानगर निवासी मदन लाल भाटिया, जो कैटरिंग का काम करते हैं, बताते हैं कि उनका पूरा काम सिलिंडरों पर निर्भर है। पहले ही गैस के दाम बढ़ने से एजेंसियों ने छूट देना बंद कर दिया था और अब सप्लाई रोकने से रोजगार पर संकट खड़ा हो जाएगा।
गोविंद नगर के मनोज कुमार, जो मिठाई की दुकान चलाते हैं, कहते हैं कि उनकी दुकान पर रोजाना तीन से चार सिलिंडर खर्च हो जाते हैं। अगर गैस नहीं मिली तो भट्ठी चलाना मुश्किल हो जाएगा और कामकाज प्रभावित होगा।
सहालग और ईद से पहले बढ़ी परेशानी
शहर में सहालग सीजन और ईद से पहले गैस सप्लाई रुकने से होटल और खानपान कारोबारियों में खलबली मच गई है। कानपुर में पांच हजार से अधिक रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानें, करीब 200 होटल और 1500 गेस्ट हाउस संचालित होते हैं।
कानपुर होटल, गेस्ट हाउस, स्वीट्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष श्यामलाल मूलचंदानी का कहना है कि यदि संकट जल्द खत्म नहीं हुआ तो शादी समारोह सीमित करने पड़ सकते हैं या कई प्रतिष्ठान अस्थायी रूप से बंद करने पड़ेंगे।
वहीं एसोसिएशन के महामंत्री राजकुमार भगतानी का कहना है कि कॉमर्शियल सिलिंडरों पर रोक समाधान नहीं है। इससे कालाबाजारी बढ़ने की आशंका है और सहालग सीजन में खानपान के दाम 25 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं।




