*उन्नाव पहुंचे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद, कहा- गंभीर हमला हुआ तो सबूत भी सामने आने चाहिए, 11 मार्च को लखनऊ से ‘धर्मयुद्ध’ का ऐलान*
ख़बर उन्नाव से है जहां शहर के सुंदर पैलेस में रविवार को पहुंचे स्वामी का श्रद्धालुओं और आयोजकों ने स्वागत किया। इस दौरान उन्होंने हाल ही में सामने आई एक कथित हमले की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कई सवाल उठाए और अपनी चल रही यात्रा व आगामी कार्यक्रमों की जानकारी भी दी। शंकराचार्य ने कहा कि जब वे रायबरेली में थे, तभी पत्रकारों के माध्यम से उन्हें एक व्यक्ति पर हमले की सूचना मिली। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति पर हिंसक हमला होना दुखद है और अहिंसा में विश्वास रखने वाला व्यक्ति ऐसी घटना से स्वाभाविक रूप से दुखी होगा।
उन्होंने बताया कि घटना के बारे में विस्तार से जानकारी मिलने के बाद कुछ शंकाएं भी उत्पन्न हुईं। जानकारी के अनुसार संबंधित व्यक्ति शौचालय जाने तक ठीक था, लेकिन बाहर आने के बाद उसने हमला होने की बात कही। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि हमला बाहर हुआ तो वहां मौजूद अन्य लोगों ने इसे क्यों नहीं देखा। शंकराचार्य ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रेलवे केवल यात्रियों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की ही जिम्मेदारी नहीं लेती, बल्कि यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जीआरपी, अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं और सीसीटीवी कैमरे मौजूद रहते हैं। ऐसे में यदि कोई गंभीर हमला हुआ है तो उसका कोई न कोई प्रमाण सामने आना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई बार आपराधिक इतिहास वाले लोग स्वयं पर हमला करवाकर या खुद हमला करके सहानुभूति प्राप्त करने की कोशिश भी करते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति को वास्तव में सुरक्षा की जरूरत है तो प्रदेश सरकार को उसे पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध करानी चाहिए। कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य ने योगी आदित्यनाथ को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि माघ मेले के बाद मुख्यमंत्री ने समाज में “कालनेमि” जैसे लोगों के आने की बात कही थी। इसके बाद यह विचार आया कि समाज में असली और नकली साधुओं की पहचान होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य से भी प्रमाण मांगा तो चर्चा शुरू हुई कि सबसे पहले उनकी ही कसौटी पर जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार सन्यास लेने वाले व्यक्ति का आचरण और जीवनशैली विशेष प्रकार की होती है, इसलिए इस विषय में स्पष्टता जरूरी है। शंकराचार्य ने गौ संरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में देशी गायों की संख्या में कमी आई है। उन्होंने दावा किया कि 2012 के बाद से लगभग 18 से 19 लाख गायें कम हो गई हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक तरफ गौभक्ति की बात की जाती है, जबकि दूसरी ओर बीफ निर्यात बढ़ने की खबरें सामने आती हैं। उनके अनुसार इस विषय पर भी समाज को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। शंकराचार्य ने बताया कि इन सभी मुद्दों को लेकर उन्होंने ‘गौ माता के लिए धर्मयुद्ध’ का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि 11 मार्च को लखनऊ से इस धर्मयुद्ध का शंखनाद किया जाएगा। उन्होंने बताया कि काशी से यात्रा शुरू कर वे विभिन्न तीर्थ स्थलों से होते हुए लखनऊ पहुंचेंगे। इसी क्रम में वे उन्नाव पहुंचे हैं और आगे नैमिषारण्य होते हुए राजधानी जाएंगे। शंकराचार्य ने कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य समाज को असली और नकली के अंतर से अवगत कराना है, ताकि धर्म के नाम पर किसी को भ्रमित न किया जा सके।
बाइट – स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज।
*अस्तित्व कुशवाहा संवाददाता*




