पांच करोड़ के बायोरेमेडिएशन पर सवाल: गंगा-पांडु में जा रहा गंदा पानी, केमिकल बचाने के लिए ठेकेदार की गड़बड़ी
डिस्ट्रिक हेड: राहुल द्विवेदी
कानपुर। गंगा और पांडु नदी को स्वच्छ बनाने के लिए नगर निगम द्वारा करीब पांच करोड़ रुपये का बायोरेमेडिएशन ठेका दिया गया है, लेकिन इसके बावजूद हर दिन लगभग 5.30 करोड़ लीटर गंदा पानी नालों के जरिए सीधे नदियों में गिर रहा है। अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया कि कई स्थानों पर लगे बायोरेमेडिएशन टैंकों के वाल्व बंद या खराब हैं, जिससे नालों में रसायन नहीं पहुंच पा रहा है।
सूत्रों के अनुसार केमिकल बचाने के लिए ठेकेदार द्वारा टैंकों को बंद रखा जाता है, जबकि अधिकारियों के निरीक्षण के समय ही इन्हें चालू किया जाता है। इससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
14 नालों के लिए दिया गया है ठेका
नगर निगम ने रानी घाट और रफाका समेत 14 नालों के पानी को बायोरेमेडिएशन तकनीक से शोधित करने का ठेका ऑर्गनिक 121 साइंटिफिक प्राइवेट लिमिटेड को दिया है। इसके तहत नालों के मुहाने पर प्लास्टिक की 25 टंकियां लगाई गई हैं जिनमें बैक्टीरिया युक्त रसायन डाले जाते हैं, जो नालों की गंदगी को अवशोषित करते हैं।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आई।
कई टैंकों के वाल्व बंद या खराब
पड़ताल के दौरान रानी घाट नाले पर लगी एक टंकी का वाल्व खराब मिला, जिससे रसायन नाले में नहीं जा रहा था। वहीं पनकी नाले में लगी टंकी का वाल्व पूरी तरह बंद पाया गया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, टंकियों में रसायन कभी भरा रहता है तो कभी खाली। अधिकारियों के आने से पहले ही टैंक चालू कर दिए जाते हैं और उनके जाने के बाद बंद कर दिए जाते हैं।
पांडु नदी में सीधे गिर रहा गंदा पानी
पनकी पड़ाव स्थित नाले के पास लगी टंकी में रसायन भरा था, लेकिन नाले में जाने वाला नल बंद होने के कारण रसायन नाले में नहीं जा रहा था। इससे गंदा पानी सीधे पांडु नदी में गिर रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कंपनी महीने में केवल एक-दो बार ही टैंकर से केमिकल भरती है, जबकि इसे लगातार नालों में गिरना चाहिए।
झाड़ियों में छिपाई गई टंकी
अटल घाट के पास परमिया नाला (रामेश्वर नाला) में ठेकेदार ने टंकी को झाड़ियों के बीच लगा दिया है, जिससे वास्तविक स्थिति छिपी रहे। आसपास के लोगों ने भी वहां टंकी लगे होने की जानकारी से इनकार किया।
पहले भी मिली थीं खाली टंकियां
14 फरवरी को भी पांडु नदी में गिरने वाले नालों की जांच में तीन टंकियां खाली मिली थीं। इसके बाद अपर नगर आयुक्त मोहम्मद आवेश खान और मुख्य अभियंता एसएफए जैदी ने चेतावनी दी थी। अधिकारियों ने रोज लाइव फोटो और वीडियो भेजने के निर्देश दिए थे, लेकिन होली की छुट्टियों के दौरान फिर से लापरवाही सामने आ गई।
स्थानीय लोगों ने लगाए आरोप
पनकी पड़ाव निवासी मनीष बाजपेई का कहना है कि
“केमिकल डालकर फोटो-वीडियो बना लिए जाते हैं और बाद में वाल्व बंद कर दिया जाता है। महीनों से टैंक खाली पड़े रहते हैं।”
वहीं सोनू शुक्ला का आरोप है कि
“टैंक केवल दिखावे के लिए लगाए गए हैं। अधिकारी आते हैं तो उनमें थोड़ा केमिकल डाल दिया जाता है, फिर सब भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।”
जांच के बाद होगी कार्रवाई
प्रभारी अभियंता (पर्यावरण) दिवाकर भास्कर ने कहा कि
“नालों के पानी को बायोरेमेडिएशन विधि से शोधित किया जा रहा है। यदि इसमें किसी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।”




