कानपुर में नकली दरोगा गिरफ्तार, लखनऊ में फर्जी परीक्षा व इंटरव्यू कराकर करता था लाखों की ठगी
डिस्ट्रिक हेड: राहुल द्विवेदी
कानपुर में पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जो पुलिस की वर्दी पहनकर खुद को दरोगा बताता था और सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से लाखों रुपये की ठगी करता था। आरोपी का नाम संजय कुमार सिंह बताया गया है, जो लंबे समय से इस फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने एक बड़े ठगी गिरोह के खुलासे का दावा किया है।
मामला अनवरगंज थाना क्षेत्र का है। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक युवक पुलिस की वर्दी पहनकर इलाके में घूम रहा है और लोगों पर रौब जमाकर खुद को दरोगा बता रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने कल्याणी रोड स्थित कूड़ा घर के पास घेराबंदी कर आरोपी संजय कुमार सिंह को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय आरोपी पूरी पुलिस वर्दी में था और खुद को विभाग का अधिकारी बताने की कोशिश कर रहा था।
तलाशी के दौरान आरोपी के पास से कई चौंकाने वाले सामान बरामद हुए। पुलिस को उसके पास से पुलिस विभाग और CBI के फर्जी पहचान पत्र, एक पूर्व प्रमुख सचिव का लेटर पैड, पुलिस वर्दी, बेल्ट, जूते, पी-कैप, लाइटर पिस्टल, जिंदा कारतूस और फर्जी नंबर प्लेट बरामद हुई। इन सामानों को देखकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए, क्योंकि आरोपी ने खुद को पूरी तरह से एक असली पुलिस अधिकारी की तरह तैयार कर रखा था।
पूछताछ में आरोपी ने कबूल किया कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देता था। आरोपी लखनऊ के होटलों और प्राइवेट स्कूलों को किराए पर लेकर फर्जी परीक्षा और इंटरव्यू आयोजित करता था। अभ्यर्थियों को बताया जाता था कि यह प्रक्रिया किसी बड़े विभाग की भर्ती से जुड़ी है। परीक्षा और इंटरव्यू के बाद उनसे नौकरी पक्की कराने के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी।
जब पीड़ित अभ्यर्थी नौकरी लगने में देरी को लेकर सवाल करते थे, तो आरोपी उन्हें रिजल्ट आने में समय लगने की बात कहकर डराता-धमकाता था। कई बार पुलिस और सीबीआई का नाम लेकर उन्हें चुप रहने की धमकी भी दी जाती थी, ताकि कोई शिकायत न कर सके।
इस पूरे मामले पर डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी संजय सिंह अपने दो अन्य साथियों दुर्गेश सविता और विजय चौहान के साथ मिलकर इस गिरोह को चला रहा था। दोनों आरोपी फिलहाल फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश कर दिया है।
पुलिस का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और ठगी की कुल रकम की जानकारी जुटाई जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि अब तक कितने युवाओं को इस फर्जी भर्ती प्रक्रिया का शिकार बनाया गया। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी सरकारी नौकरी के नाम पर पैसे मांगने वालों से सावधान रहें और ऐसी किसी भी गतिविधि की तुरंत पुलिस को सूचना दें।




