भूपेश को पुलिस न कर सकी गिरफ्तार, हाईकोर्ट से लाया स्टे; एसीपी नौबस्ता ने लगाई चार्जशीट, आज सुनवाई
डिस्ट्रिक हेड। राहुल द्विवेदी
Kanpur में भाजपा नेता Bhupesh Awasthi के खिलाफ करीब 15 साल पुराने रंगदारी और डकैती के मामले में जूही पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच में आरोपों को सही पाए जाने के बाद पुलिस ने धाराएं और बढ़ाई हैं। हालांकि, गिरफ्तारी से पहले भूपेश अवस्थी हाईकोर्ट से स्टे लेने में सफल रहे हैं, जिसके चलते 8 अप्रैल तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगी हुई है।
2011 का मामला, कोर्ट के आदेश पर हुई अग्रिम विवेचना
साकेत नगर निवासी एक महिला होटल कारोबारी ने 31 जनवरी 2011 को Juhi Police Station में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि साकेत नगर निवासी अधिवक्ता Akhilesh Dubey, जूही लाल कॉलोनी निवासी अजय निगम, उनके भाई अनुज निगम, भूपेश अवस्थी और उनके बेटे रोहित अवस्थी ने होटल चलाने के नाम पर दो लाख रुपये की रंगदारी मांगी। विरोध करने पर आरोपियों ने डकैती डालकर नकदी लूट ली और मारपीट भी की।
बताया गया कि तत्कालीन विवेचक ने महज पौने पांच घंटे में एफआर लगा दी थी। इसके बाद अदालत के आदेश पर मामले की अग्रिम विवेचना शुरू हुई। जांच दोबारा शुरू होते ही भूपेश अवस्थी और उनका बेटा भूमिगत हो गए थे, जिस पर कोर्ट ने दोनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कर दिया था।
गंभीर धाराओं में चार्जशीट दाखिल
विवेचना के बाद पुलिस ने बलवा, हथियारों से लैस होकर दंगा, जबरन वसूली, मौत का डर दिखाकर वसूली, झूठा आपराधिक आरोप, अश्लील सामग्री का प्रचार, आपराधिक बल प्रयोग, सामान्य इरादा और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं में चार्जशीट दाखिल की है। इसके साथ ही स्वेच्छा से चोट पहुंचाना, जानबूझकर अपमानित करना, आपराधिक धमकी और डकैती जैसी गंभीर धाराएं भी बढ़ाई गई हैं। यह चार्जशीट एसीपी नौबस्ता की ओर से अदालत में दाखिल की गई है।
हाईकोर्ट से राहत, जिला अदालत में सुनवाई आज
गिरफ्तारी से बचने के लिए भूपेश अवस्थी ने Allahabad High Court में याचिका दाखिल की थी, जिस पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी।
इसी मामले में आज 13 फरवरी को भूपेश अवस्थी की अग्रिम जमानत पर अपर जिला जज प्रथम की अदालत में सुनवाई होगी। वहीं, इसी मुकदमे में जेल में बंद अधिवक्ता अखिलेश दुबे की जमानत याचिका पर भी अदालत में सुनवाई प्रस्तावित है।
चार्जशीट दाखिल होने और आज की सुनवाई के चलते यह मामला एक बार फिर कानपुर की सियासत और न्यायिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।




