एचडीएफसी बैंक विवाद ने पकड़ा जातीय तूल
Tripathi vs ठाकुर: “क्या ब्राह्मण या त्रिपाठी होना पाप है?”
आस्था सिंह के बाद ऋतु त्रिपाठी की सफाई, दोनों पक्ष आमने-सामने
डिस्ट्रिक हेड। राहुल द्विवेदी
कानपुर।
एचडीएफसी बैंक की एक शाखा में हुआ मामूली विवाद अब जातीय बहस और सामाजिक टकराव में बदलता जा रहा है। वायरल महिला कर्मचारी आस्था सिंह के बाद अब ऋतु त्रिपाठी भी कैमरे के सामने आई हैं। दोनों महिलाओं के बयान सामने आने के बाद यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है।
ऋतु त्रिपाठी ने न्यूज़ चैनल से बातचीत में पूरे घटनाक्रम को विस्तार से बताते हुए आस्था सिंह पर अभद्र व्यवहार और अपमानजनक भाषा का आरोप लगाया है। वहीं, आस्था सिंह ने भी खुद को सही ठहराते हुए कहा है कि उन्हें ठाकुर होने पर गर्व है और यह मामला जानबूझकर जातिवाद का रूप दिया जा रहा है।
“सिर्फ एटीट्यूड के चलते हुई बदसलूकी” — ऋतु त्रिपाठी
ऋतु त्रिपाठी ने कहा कि वह एचडीएफसी बैंक की पनकी शाखा में कैशियर के पद पर कार्यरत हैं। उनके अनुसार—
“बिना किसी ठोस कारण के मेरे साथ बदतमीजी की गई।
सिर्फ एटीट्यूड के चलते अभद्र भाषा का प्रयोग हुआ।”
ऋतु ने सवाल उठाया—
“क्या ब्राह्मण होना पाप है?
क्या त्रिपाठी होना गुनाह है?”
उन्होंने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई या जाति-धर्म की बात कर किसी को अपमानित करना गलत है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पति का बयान — “हम बहुत अपमानित महसूस कर रहे हैं”
ऋतु त्रिपाठी के पति ने भी पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि
“इस विवाद से हमारा परिवार मानसिक रूप से आहत हुआ है।
हमें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया।”
आस्था सिंह का पक्ष — “मैं ठाकुर हूं, मुझे इस पर गर्व है”
दूसरी ओर, महिला कर्मचारी आस्था सिंह ने भी न्यूज़ चैनल से बातचीत में अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा—
“मैं ठाकुर हूं और मुझे इस पर गर्व है।
यह किसी ग्राहक का मामला नहीं, बल्कि एक कर्मचारी के पति द्वारा गलत भाषा प्रयोग का मामला है।”
आस्था सिंह ने कहा कि
“मैं पहले एक महिला हूं और मेरा भी आत्मसम्मान है।
अगर कोई मुझसे कहे कि ‘तुम्हारी गर्मी निकाल दूंगा’, तो उस समय मुझे जो सही लगा, मैंने वही किया।”
उन्होंने यह भी कहा कि
“हम ब्राह्मणों का सम्मान करते हैं, मैंने किसी को नीचा दिखाने की कोशिश नहीं की।”
सोशल मीडिया पर दो गुट, मामला लगातार वायरल
इस विवाद के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग दो खेमों में बंटते नजर आ रहे हैं।
कुछ लोग आस्था सिंह के समर्थन में हैं, तो कुछ ऋतु त्रिपाठी के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।
मामले को लेकर जाति, सम्मान और कार्यस्थल की मर्यादा पर बहस तेज हो गई है।
बड़ा सवाल
क्या बैंक जैसे प्रोफेशनल संस्थानों में व्यक्तिगत विवाद अब जातीय रंग ले रहे हैं?
या यह मामला सोशल मीडिया ट्रायल का शिकार बन गया है?
फिलहाल, दोनों पक्षों के बयान सामने हैं।
सच्चाई क्या है, यह जांच और तथ्यों के बाद ही स्पष्ट होगी।




