बजट एलानों से बाजार में भूचाल, भारी गिरावट के साथ क्लोजिंग; सेंसेक्स 1547 अंक टूटा, निफ्टी करीब 2% फिसला
डिस्ट्रिक हेड | राहुल द्विवेदी
केंद्रीय बजट 2026 के एलानों के बाद शेयर बाजार में जोरदार बिकवाली देखने को मिली। खासकर फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने की घोषणा ने निवेशकों की धारणा को झटका दिया। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों करीब दो प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
कारोबार के दौरान बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स दिन में 2,370 अंक से ज्यादा टूटकर 80,000 के स्तर से नीचे चला गया। अंत में सेंसेक्स 1,546.84 अंक या 1.88 प्रतिशत गिरकर 80,722.94 पर बंद हुआ।
वहीं, 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी भी दबाव में रहा और 495.20 अंक या 1.96 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,825.45 पर बंद हुआ। दिन के कारोबार में निफ्टी करीब 748.90 अंक तक फिसलकर 24,571.75 के निचले स्तर तक पहुंच गया था।
STT बढ़ने से बिगड़ा बाजार का मूड
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान वायदा सौदों पर एसटीटी को बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने की घोषणा की। इसके अलावा शेयर बायबैक टैक्सेशन से जुड़े नियमों में बदलाव का भी एलान किया गया। इन फैसलों के बाद निवेशकों, खासकर डेरिवेटिव सेगमेंट में सक्रिय ट्रेडर्स में बेचैनी बढ़ गई और बाजार में चौतरफा बिकवाली शुरू हो गई।
सरकार ने छोटे निवेशकों की सुरक्षा के नाम पर बायबैक टैक्स ढांचे में बदलाव किया है। इसके तहत सभी शेयरधारकों पर पूंजीगत लाभ के रूप में टैक्स लगाने का प्रस्ताव है। कॉरपोरेट प्रवर्तकों पर 22 प्रतिशत और गैर-कॉरपोरेट प्रवर्तकों पर 30 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान किया गया है।
विशेषज्ञों की राय क्या कहती है?
एक्सिस सिक्योरिटीज के एमडी और सीईओ प्रणव हरिदासन ने कहा कि बाजार की मौजूदा बेचैनी का मुख्य कारण एफएंडओ सेगमेंट, खासकर फ्यूचर्स पर एसटीटी में तेज बढ़ोतरी है। उन्होंने कहा कि पिछले साल कैपिटल गेंस टैक्स बढ़ने के बाद अब एसटीटी में वृद्धि से कुल लेनदेन लागत और बढ़ गई है।
हरिदासन के मुताबिक, फ्यूचर्स एक मार्जिन-आधारित और जोखिम प्रबंधित उत्पाद है और आमतौर पर खुदरा निवेशकों की अतिरिक्त आय का मुख्य स्रोत नहीं होता। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या एसटीटी बढ़ाने से वांछित उद्देश्य पूरे होंगे या इससे बाजार की तरलता और प्रतिस्पर्धात्मकता को नुकसान पहुंचेगा।
चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग के तकनीकी विश्लेषक आकाश शाह ने कहा कि एसटीटी में वृद्धि, खासकर एफएंडओ में, निकट भविष्य में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए नकारात्मक साबित हो सकती है। उच्च आवृत्ति और डेरिवेटिव आधारित वैश्विक फंडों पर इसका असर पड़ सकता है।
वहीं, एचडीएफसी सिक्योरिटीज के एमडी और सीईओ धीरज रेली का मानना है कि अल्पावधि में यह कदम बाजार के लिए निराशाजनक हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि में इससे बाजार की स्थिरता और अनुशासन बढ़ सकता है।
सेक्टोरल इंडेक्स और शेयरों का हाल
सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के शेयरों में सबसे ज्यादा 5.61 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अदानी पोर्ट्स के शेयर 5.53 प्रतिशत टूटे। इसके अलावा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटीसी, टाटा स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट और रिलायंस इंडस्ट्रीज भी नुकसान में रहीं।
दूसरी ओर, टीसीएस, इंफोसिस, सन फार्मा और टाइटन के शेयरों में सीमित बढ़त देखने को मिली।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो बीएसई पीएसयू बैंक में 5.60 प्रतिशत की सबसे ज्यादा गिरावट रही। इसके बाद धातु, कमोडिटीज, ऊर्जा, पूंजीगत वस्तुओं और यूटिलिटी सेक्टर में भी भारी दबाव देखने को मिला। आईटी सेक्टर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहा।
आगे बाजार की चाल पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि बजट के बाद बाजार कुछ समय तक अस्थिर रह सकता है। निवेशकों की नजर अब सरकार की नीतियों के दीर्घकालिक असर और विदेशी निवेशकों की प्रतिक्रिया पर टिकी रहेगी। फिलहाल, एसटीटी बढ़ोतरी का असर बाजार की धारणा पर भारी पड़ता नजर आ रहा है।




