केंद्रीय बजट 2026-27 से कानपुर की लेदर इंडस्ट्री को बड़ी राहत, आईजीसीआर स्कीम के विस्तार से निर्यात को मिलेगी रफ्तार
डिस्ट्रिक हेड। राहुल द्विवेदी
कानपुर।केंद्रीय बजट 2026-27 ने कानपुर की लेदर (चर्म) इंडस्ट्री को बड़ी व्यापारिक राहत दी है। बजट में लेदर इकाइयों को आईजीसीआर (IGCR) स्कीम के दायरे में शामिल किए जाने और योजना की समयसीमा बढ़ाए जाने से उद्योग जगत में नई उम्मीद जगी है। खास तौर पर शू अपर एक्सपोर्टर्स को मिली नई छूट से मौजूदा 222 मिलियन डॉलर के निर्यात कारोबार को वैश्विक स्तर पर नई उड़ान मिलने की संभावना है।
कानपुर और आसपास के क्षेत्रों में लगभग एक हजार छोटी-बड़ी लेदर इकाइयां संचालित हैं, जिनमें से कई बीते वर्षों से बंदी के कगार पर थीं। हालांकि हाल के महीनों में यूरोपीय देशों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और अब बजट में घोषित राहतों से उद्योग के दोबारा पटरी पर लौटने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। उद्योग जगत ने बजट में आईजीसीआर स्कीम के विस्तार का स्वागत किया है।
वैल्यू एडेड उत्पादों के निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
कस्टम नोटिफिकेशन नंबर 2/2026 के तहत अब शू अपर एक्सपोर्टर्स को भी आईजीसीआर स्कीम में शामिल किया गया है। इससे पहले यह सुविधा केवल लेदर गारमेंट्स, फुटवियर और अन्य लेदर उत्पादों तक सीमित थी। उद्यमियों का मानना है कि इससे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। वर्ष 2024-25 में शू अपर का निर्यात 222 मिलियन डॉलर रहा था, जिसके अब और बढ़ने की उम्मीद है।
इसके साथ ही आईजीसीआर के तहत निर्यात की समयसीमा छह महीने से बढ़ाकर एक वर्ष कर दी गई है और योजना को 31 मार्च 2028 तक बढ़ाने का फैसला भी उद्योग के लिए राहत भरा माना जा रहा है।
निर्यात के साथ रोजगार भी बढ़ेगा
टैग, लेबल, स्टिकर और बेल्ट जैसे आयातित इनपुट्स पर कस्टम ड्यूटी में दी गई अतिरिक्त छूट से भी उद्योग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
चर्म निर्यात परिषद के पूर्व रीजनल चेयरमैन जावेद इकबाल ने कहा कि बजट में आईजीसीआर स्कीम के विस्तार और यूरोपीय बाजारों में मिली राहत से कानपुर के पारंपरिक लेदर उद्योग को नई दिशा मिलेगी। इससे निर्यात बढ़ेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे




