कागज़ों पर ‘स्मार्ट’ कानपुर, ज़मीन पर अंधेरा; सिस्टम की लापरवाही से जनता बेहाल
डिस्ट्रिक हेड। राहुल द्विवेदी।
कानपुर। औद्योगिक नगरी कानपुर में विकास के दावों की पोल खुलती नज़र आ रही है। एक तरफ शहर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए करोड़ों के बजट का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर के कई रिहायशी इलाके बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। नगर निगम की कार्यप्रणाली और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने शहर की व्यवस्था को ‘खोखला’ कर दिया है। विकास केवल कागज़ों और नेताओं के भाषणों तक सीमित रह गया है, जबकि आम जनता टैक्स के बोझ तले दबकर भी अंधेरे में जीने को मजबूर है।
रतनपुर और जवाहरपुरम: भ्रष्टाचार का अंधेरा
शहर के रतनपुर इलाके से सिस्टम की घोर लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहाँ जवाहरपुरम सेक्टर-13, एकता एन्क्लेव और शताब्दी नगर से एल्डिको कॉलोनी को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग वर्षों से अंधेरे में डूबा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें तो लगा दी गई हैं, लेकिन वे कभी जलती नहीं। करोड़ों के खर्च से लगे ये खंभे अब महज शोपीस बनकर रह गए हैं। शाम ढलते ही पूरा इलाका सुनसान और डरावना हो जाता है।
महिलाओं और बुजुर्गों में दहशत
सड़कों पर रोशनी न होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि अंधेरे का फायदा उठाकर असामाजिक तत्व सक्रिय रहते हैं, जिससे घर से निकलना भी दूभर हो गया है। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह मार्ग किसी जोखिम से कम नहीं है। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही।
नेताओं का विकास, जनता का विनाश
क्षेत्र की जनता का गुस्सा मेयर प्रमिला पांडेय और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि नेता केवल चुनाव के समय दिखाई देते हैं। कागज़ों पर विकास का ढोल पीटा जा रहा है, लेकिन हकीकत में भ्रष्टाचार और मिलीभगत ने शहर को जर्जर बना दिया है। नगर निगम के विभागों में होने वाली बैठकें केवल चाय-नाश्ते और औपचारिकताओं तक सीमित हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी और नेताओं की खामोशी यह साबित करती है कि व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी है।
सवालों के घेरे में नगर निगम
नगर निगम के रिकॉर्ड में भले ही शहर दूधिया रोशनी से नहा रहा हो, लेकिन धरातल पर भ्रष्टाचार की दीमक सिस्टम को चाट रही है। जनता के हिस्से में केवल टैक्स की भरमार है, सुविधाओं के नाम पर उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। यदि समय रहते इन क्षेत्रों में प्रकाश की व्यवस्था और बुनियादी सुधार नहीं किए गए, तो जनता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।




