उन्नाव में दशहरे का रावण मुस्लिम परिवार बनाता है – चार पीढ़ियों से कायम है परंपरा, गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल
एंकर – उन्नाव से गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक अनोखी मिसाल सामने आई है। दशहरे के मौके पर जिस रावण का दहन होता है, उसे बनाने का काम पिछले चार पीढ़ियों से एक मुस्लिम परिवार कर रहा है। परंपरा को निभाते हुए आज भी इस परिवार के सदस्य रावण की विशाल प्रतिमा तैयार करते हैं, जिसे जनपद के अलग-अलग क्षेत्रों में दहन के लिए भेजा जाता है।
शुक्लागंज राजधानी मार्ग पर होने वाले रावण दहन के लिए इस बार भी रावण की प्रतिमा मोहम्मद अरमान ने ही तैयार की है। अरमान ने बताया कि यह काम उनके परिवार में 1950 से चला आ रहा है। उनके दादा के जमाने से लेकर अब तक यह सिलसिला लगातार जारी है। वह गर्व से बताते हैं कि उन्होंने और उनके परिवार ने उन्नाव के अलावा कानपुर के हरमापुर, जाजमऊ स्टेट, लाल बंगला, श्याम नगर समेत कई जगहों पर रावण की प्रतिमाएँ बनाई हैं।
अरमान का कहना है कि यह उनके लिए महज़ कारोबार नहीं बल्कि एक परंपरा और जिम्मेदारी है, जिसे वह निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जैसे उनके पिता ने यह जिम्मेदारी निभाई, वैसे ही अब यह जिम्मेदारी आगे आने वाली पीढ़ियों को सौंपी जाएगी। यही वजह है कि वह चाहते हैं कि उनके बच्चे भी इस परंपरा को आगे बढ़ाएँ।
जब उनसे मौजूदा हालात और विवादित नारों को लेकर सवाल पूछा गया, तो अरमान ने बेहद परिपक्व जवाब दिया। उन्होंने कहा – “हम इस काम को कारोबार की नजर से देखते हैं। बाकी किसी का ‘आई लव मोहम्मद’ कहना या किसी का ‘आई लव महादेव’ कहना, यह सब उनकी पर्सनल बातें हैं। हमारा काम उनसे अलग है। हम अपने धर्म को मानते हैं और दूसरों का सम्मान करते हुए अपने हिस्से का योगदान देते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि असल मायने में यह परंपरा सद्भाव और भाईचारे का पैगाम देती है। दशहरे पर रावण बनाना और उसका दहन होना हिंदू समाज का उत्सव है, लेकिन इसमें मुस्लिम परिवार का योगदान यह दर्शाता है कि त्योहार सिर्फ धर्म का नहीं बल्कि समाज की साझी संस्कृति का प्रतीक हैं।
आम दिनों में अरमान और उनका परिवार अलग-अलग नौकरियाँ करते हैं, लेकिन दशहरे पर जब रावण बनाने की जिम्मेदारी आती है, तो वे पूरे मन से इसे निभाते हैं। यही कारण है कि दशकों से यह परंपरा कायम है और हर साल इसे देखने के लिए लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं।
बाइट- मोहम्मद अरमान ( रावण का पुतला बनाने वाला युवक )
उन्नाव में मुस्लिम परिवार द्वारा रावण बनाने की यह परंपरा, गंगा-जमुनी तहज़ीब की जीवंत तस्वीर पेश करती है और आने वाली पीढ़ियों के लिए सद्भाव और एकता का संदेश छोड़ती है।
रिपोर्टर :- अस्तित्व कुशवाहा उन्नाव संवाददाता




