*कानपुर नगर निगम द्वारा किया जाता रहा है सरकारी संपत्ति के साथ खिलवाड़ व मनमानी तरीके से जेब फाड़ ग़फलत*
टाइम्स एंड स्पेस
डिस्टिक हेड राहुल द्विवेदी
*कानपुर नगर निगम द्वारा किया जाता रहा है सरकारी संपत्ति के साथ खिलवाड़ व मनमानी तरीके से जेब फाड़ ग़फलत*
*शहरवासियों के बच्चों के लिए खोला गया था पहला मनोरंजन पार्क, कभी एंट्री के लिए टिकट होती थी ब्लैक… आज खंडहर क्यों बन गया*?
1991 में खुला मिक्की हाउस, #कानपुर का पहला बड़ा एंटरटेनमेंट पार्क।
उस समय ऐसा क्रेज़ था कि टिकट तक ब्लैक में बिकते थे।
हर कानपुरिया के बचपन की यादों में आज भी इसका नाम दर्ज है।
*लेकिन आज*?
❌ झूले जंग खा चुके हैं।
❌ पार्क सूना और खंडहर हो चुका है।
❌ पिछले कई सालों से सील और बंद है।
कानूनी पहलू
✔ नगर निगम अधिकारी द्वारा बताया जा रहा है कि
लीज रिन्यूवल न होने पर साउथ एशियन इंटरप्राइजेज लिमिटेड के मालिक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिए थे कि इस पर निर्णय लिया जाए।
नगर निगम ने निर्णय लेते हुए लीज पूरी होने के बाद रिन्यूवल से मना कर दिया।
*लेकिन वहीं नगर निगम द्वारा कई पार्कों के निर्माण पर विचार किया जा रहा है लेकिन पूर्व के पार्कों पर कोई प्राथमिकता नहीं दी जा रही है, सिर्फ़ करोड़ों के झोल पर कार्य करने की प्रतिक्रियाएं चालू करने के लिए नए स्तर पर पार्कों को निर्माण पर मंथन किया जा रहा है*
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सवाल ये है:
❓ कानपुर का पहला बच्चों का मनोरंजन पार्क क्यों खत्म कर दिया गया?
❓ लीज रिन्यू न करने के बाद इस जगह का विकास क्यों नहीं हुआ?
❓ करोड़ों के पार्क बजट के बावजूद बच्चों के लिए नया मॉडर्न पार्क क्यों नहीं?
लखनऊ में नए पार्क, थीम पार्क बन रहे हैं…
तो कानपुर में सिर्फ यादें क्यों बचीं?
क्या अब समय नहीं कि मिक्की हाउस जैसी जगहों को फिर से जिंदा किया जाए?




