दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित हुई राष्ट्रीय संगोष्ठी।
प्रोफेसर केपी सिंह की पुस्तक “80 ग्लोरियस ईयर्स ऑफ डिपार्टमेंट ऑफ़ लाइब्रेरी
एंड इनफॉरमेशन साइंस(1946-2026)का “लोकार्पण।
पुस्तकालय केवल पुस्तकों का संग्रह नहीं है:- महामहिम शिव प्रताप शुक्ला
नई दिल्ली।
दिल्ली विश्वविद्यालय के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग एवं दिल्ली पुस्तकालय संघ के संयुक्त तत्वावधान में पुस्तकालय दिवस के अवसर पर “राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान शिक्षा ”विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल और महत्वपूर्ण आयोजन टैगोर सभागार,दिल्ली विश्वविद्यालय,दिल्ली में किया गया।
इस भव्य समारोह का उद्घाटन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि तेलंगाना के राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ला जी ने किया।अध्यक्षता दिल्ली विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो.बलराम पाणि ने की।डॉ.अजय शंकर पांडेय,पूर्व भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी एवं पूर्व आयुक्त, झांसी तथा प्रो.पायल मग्गो,निदेशक,मुक्त शिक्षा महाविद्यालय,दिल्ली विश्वविद्यालय सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ पुस्तकालय विज्ञान के जनक डॉ.एस.आर.रंगनाथन की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ।इसके उपरांत महामहिम द्वारा नव-निर्मित संगोष्ठी और व्याख्यान कक्ष का उद्घाटन किया गया।दीप प्रज्ज्वलन और राष्ट्रगीत के साथ कार्यक्रम शुभारंभ हुआ।
सम्मेलन की पृष्ठभूमि एवं उद्देश्यों पर प्रो.एम.पी.सिंह ने प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान शिक्षा को आधुनिक,कौशल परक तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुकूल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो.के.पी.सिंह ने अपने स्वागत भाषण में सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए विभाग की शैक्षणिक एवं शोध गतिविधियों का उल्लेख किया।इस अवसर पर हिन्दू अध्ययन केंद्र दिल्ली विश्वविद्यालय की संयुक्त निदेशक डॉ.प्रेरणा मल्होत्रा ने विभाग की 80 वर्षों की गौरवशाली यात्रा पर आधारित पुस्तक के संबंध में जानकारी प्रस्तुत की।राज्यपाल जी के कर-कमलों द्वारा पुस्तक का लोकार्पण किया गया।
इसके साथ ही “दिल्ली पुस्तकालय संघ जीवनपर्यंत उपलब्धि सम्मान-2026” से प्रो.पी.बी.मंगला तथा “दिल्ली पुस्तकालय संघ जन-जागरूकता एवं प्रचार-प्रसार अवार्ड -2026” से प्रो.मनोज कुमार कैन को महामहिम द्वारा सम्मानित किया गया।प्रो.कैन को यह सम्मान पुस्तकालय एवं ज्ञान-संवर्धन के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया गया।
अपने संबोधन में माननीय राज्यपाल श्री शिव प्रताप शुक्ला जी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के महत्व पर प्रकाश डालते हुए शिक्षा,ज्ञान और नवाचार की भूमिका को रेखांकित किया।उन्होंने पुस्तकालयों को केवल पुस्तकों के संग्रह का केंद्र न मानकर ज्ञान,अनुसंधान और सामाजिक जागरूकता के सशक्त केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के क्षेत्र में आधुनिक प्रौद्योगिकी और डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के महत्व को भी रेखांकित किया।उन्होंने बताया पुस्तकालय को भारत की संस्कृति का जनक माना जाता है।उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि आज युवाओं से बात करके अपनी संस्कृति के बारे में बताने की आवश्यकता है।अपने परिवार के बच्चों को समझाते हुए उनके व्यावहारिक ज्ञान को समृद्ध करने की जरूरत है।जेन-जी के प्रश्नों का उत्तर देना चाहिए,समझाना चाहिए समाधान देना चाहिए।उस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देनी चाहिए। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि नेपाल में व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन ने उसकी पूरी धरोहर और अनेक प्रकार की संस्कृति को नष्ट कर दिया परंतु अब नेपाल अपनी पुरानी लोकतांत्रिक पद्धति पर ही चल रहा है।
डॉ.अजय शंकर पांडेय ने शिक्षा और ज्ञान को राष्ट्र एवं समाज के विकास का महत्वपूर्ण आधार बताया।अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. बलराम पाणि ने उच्च शिक्षा में अनुसंधान,नवाचार तथा बहुविषयक दृष्टिकोण के महत्व को रेखांकित किया उद्घाटन सत्र के अंत में वरिष्ठ प्रो.आर.के.भट्ट ने सभी का आभार व्यक्त किया।
सम्मेलन के विभिन्न तकनीकी सत्रों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के परिप्रेक्ष्य में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान शिक्षा,कृत्रिम बुद्धिमत्ता,उभरती प्रौद्योगिकियों तथा आधुनिक पुस्तकालय सेवाओं से संबंधित विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
समापन सत्र में प्रो.संजय श्रीवास्तव,कुलपति,मानव रचना विश्वविद्यालय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।इस सत्र की अध्यक्षता प्रो.के.पी.सिंह,ने की।श्री सिया शरण प्रधान निदेशक- सीएजी,भारत तथा डॉ.पुष्कर मिश्रा,निदेशक,रामपुर रज़ा पुस्तकालय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। डॉ मनीष कुमार द्वारा समस्त आयोजन की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
सार्थक,उपयोगी,ज्ञानवर्धक आयोजन में डॉ. जनेंद्र नारायण सिंह,डॉ पिंकी तथा आयोजन समिति के अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
यह राष्ट्रीय सम्मेलन पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान के शिक्षकों, शोधार्थियों,विद्यार्थियों तथा पुस्तकालय कर्मियों के लिए विचार-विमर्श और ज्ञान-विनिमय का एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुआ। सम्मेलन में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020,आधुनिक प्रौद्योगिकी तथा ज्ञान-आधारित समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान शिक्षा को विकसित करने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। इस प्रकार यह आयोजन पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान शिक्षा के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण एवं सार्थक पहल सिद्ध हुआ।




