धान की फसल में पोषक तत्वों का पर्णीय छिड़काव पर हुआ दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण
कानपुर नगर, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर द्वारा ग्राम प्रतापपुर ऊदैत में धान की फसल में पोषक तत्वों का पर्णीय छिड़काव पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर खलील खान ने बताया कि धान की फसल में पोषक तत्वों का पर्णीय छिड़का जड़ों के माध्यम से खाद देने का एक असरदार विकल्प है। इससे पौधे जल्दी पोषक तत्व लेते हैं। इससे पैदावार बढ़ती है और दाने चमकते हैं। कम खाद में ही बहुत अच्छा असर मिलता है।पौधे मजबूत बनते हैं और बीमारियाँ कम लगती हैं।बालियों में दाने स्वस्थ और वजनी बनते हैं।प्रमुख पोषक तत्व 2 प्रतिशत घोल (20 ग्राम यूरिया प्रति लीटर पानी) कल्ले फूटते समय या बालियां निकलते समय छिड़कें।0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट और साथ में आधा चूना मिलाकर छिड़काव करें।एनपीके (19:19:19): 1 से 2 किलोग्राम प्रति एकड़ 100 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।बोरॉन: 0.2 प्रतिशत घोल का प्रयोग फूल आने से पहले करने से फूलों का झड़ना रुकता है।हमेशा सुबह या शाम के ठंडे समय में छिड़काव करें।तेज धूप या बारिश के समय छिड़काव न करें।घोल की सही मात्रा ही रखें, ज्यादा मात्रा से पत्तियां जल सकती हैं। धान में कल्ले निकलते समय या दाना भरते समय स्प्रे सबसे अच्छा रहता है। इस अवसर पर प्रसार वैज्ञानिक डॉक्टर राजेश राय ने भी किसानों को संबोधित किया।
हरिओम की रिपोर्ट




