*गेस्ट फैकल्टी भर्ती पर उठे सवाल, चयन प्रक्रिया रोकने की मांग*
*दिव्यांग अभ्यर्थी ने कुलसचिव को भेजा ज्ञापन, नियमों की अनदेखी का लगाया आरोप; कार्यरत शिक्षकों को सेवा विस्तार देने की अपील*
लखनऊ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में गेस्ट फैकल्टी की भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक दिव्यांग अभ्यर्थी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कुलसचिव को भेजे गए ज्ञापन में 17 जून 2026 को जारी गेस्ट फैकल्टी भर्ती विज्ञापन को नियमों के विपरीत बताते हुए चयन प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने तथा वर्षों से कार्यरत गेस्ट फैकल्टी को सेवा विस्तार देने की मांग की गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों, जैसे दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय लखनऊ और मां विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय मिर्जापुर द्वारा जारी गेस्ट फैकल्टी विज्ञापनों में आरक्षण लागू नहीं किया गया, जबकि डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय ने अलग व्यवस्था अपनाई है। इसे एक ही प्रदेश में अलग-अलग नियम लागू करने का मामला बताते हुए भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न उठाया गया है।
शिकायतकर्ता के अनुसार विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में करीब 75 गेस्ट फैकल्टी पिछले पांच वर्षों से अधिक समय से कार्यरत हैं और दिव्यांग विद्यार्थियों को निरंतर शिक्षण सेवाएं दे रहे हैं। उनका दावा है कि इन शिक्षकों को 1 जून 2026 से कार्य नहीं दिया जा रहा है, जबकि उन्हें सेवा समाप्ति का कोई आदेश भी जारी नहीं किया गया। इसके बावजूद नए गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर साक्षात्कार आयोजित किए जा रहे हैं।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 31 जुलाई 2026 को आयोजित 13वें दीक्षांत समारोह में उपाधि वितरण कार्य के लिए 27 जुलाई 2026 को जारी आदेश के माध्यम से इन्हीं कार्यरत गेस्ट फैकल्टी की ड्यूटी लगाई थी। वहीं, 27 जुलाई को जारी एक अन्य पत्र में साक्षात्कार की तिथि और आवश्यक पदों का उल्लेख तो किया गया, लेकिन उसमें आरक्षण संबंधी किसी प्रावधान का जिक्र नहीं है।
शिकायतकर्ता ने अपने पक्ष में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मनमोहन सिंह बनाम राज्य सरकार तथा प्रदीप कुमार यादव बनाम राज्य सरकार (डब्ल्यूपी-6159/2022) के निर्णयों के साथ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए दावा किया है कि कार्यरत गेस्ट फैकल्टी को दूसरे गेस्ट फैकल्टी से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता।
ज्ञापन में विश्वविद्यालय प्रशासन से चयन प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और वर्तमान में कार्यरत सभी गेस्ट फैकल्टी को सेवा विस्तार देने की मांग की गई है। साथ ही कहा गया है कि इससे दिव्यांग विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी और वर्षों से स्थापित शैक्षणिक समन्वय बना रहेगा।
इस संबंध में ज्ञापन की प्रतिलिपि उत्तर प्रदेश की राज्यपाल, मुख्यमंत्री, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग तथा भारत सरकार के प्रधानमंत्री को भी भेजी गई है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
सह संपादक
संजीव सक्सेना की रिपोर्ट




