चार सूत्रीय ज्ञापन मंडी निदेशक को सौंपा
कानपुर ननग, भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र के नेतृत्व में* उ प्र में 251 गल्ला मंडियों में गल्ला, दलहन दाल, तिलहन, किराना, गुड़ , लकड़ी व रूई आदि के व्यापारियों व उद्यमियों
के लिए जियो ऐप द्वारा वाहन टैगिंग की समानांतर ऑनलाइन व्यवस्था, गेट पास में समय-सीमा संबंधी नियम, प्रोपराइटरशिप फर्मों को पार्टनरशिप में परिवर्तित करने के जटिल नियमों को वापस लेने और नए लाइसेंस प्रक्रिया में सरलीकरण आदि मुद्दों को लेकर प्रदेश के गल्ला ,सब्जी व किराना मंडियों से आए व्यापारियों ने राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद कार्यालय, गोमती नगर में एकत्र होकर प्रदर्शन किया और चार सूत्रीय ज्ञापन मंडी निदेशक इंद्रविक्रम सिंह को सौंपा |
इस दौरान भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि* राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रदेश के अंदर कृषि उपज की खरीद-बिक्री हेतु 6-आर, 9-आर, गेट पास तथा दूसरे राज्यों से कृषि उपज लाने हेतु प्री-अराइवल स्लिप जारी करने की ऑनलाइन व्यवस्था पहले से ही लागू है। वर्तमान में प्री-अराइवल स्लिप की ऑनलाइन प्रणाली के कारण मंडी शुल्क चोरी की कोई संभावना नहीं रहती, क्योंकि स्लिप जारी होते ही उसकी जानकारी मंडी परिषद के पोर्टल पर उपलब्ध हो जाती है।
ऐसी स्थिति में दिनांक 01 जुलाई 2026 से जियोटैग ऐप के माध्यम से वाहन लोडिंग एवं अनलोडिंग के समय वाहन टैगिंग की एक और समानांतर ऑनलाइन व्यवस्था लागू करना “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” की अवधारणा के विपरीत है। इस नई व्यवस्था से व्यापारियों एवं उद्यमियों की कठिनाइयाँ बढ़ेंगी|
आगे कहा कि प्रदेश में लगभग 251 गल्ला मंडियाँ हैं जिनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश व्यापारी इस प्रकार की तकनीकी व्यवस्था का सुचारु रूप से उपयोग नहीं कर पाएंगे।परिणामस्वरूप किसानों को भी अपनी उपज बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है इसलिए इस व्यवस्था को वापस लिया जाए |
आगे कहा कि मंडियों से एक जिले से दूसरे जिले में कृषि उत्पाद ले जाने हेतु जारी किए जाने वाले गेट पास में निर्धारित समय-सीमा अत्यंत कम एवं अव्यावहारिक है। कई मामलों में समय-सीमा समाप्त होने के आधार पर व्यापारियों एवं उद्यमियों पर दंड लगाया जा रहा है जबकि मंडी शुल्क चोरी की कोई संभावना नहीं होती। अतः यह व्यवस्था पूर्णतः अनुचित है इसलिए गेटपास में समय सीमा की व्यवस्था को वापस लिया जाए| इस दौरान भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश संगठन महामंत्री बनवारीलाल गुप्ता व प्रदेश संयुक्त महामंत्री कृष्ण कुमार गुप्ता रामू ने कहा कि* गत वर्ष मंडी परिषद द्वारा प्रोपराइटरशिप फर्मों को पार्टनरशिप में परिवर्तित करने का प्रावधान लागू किया गया, जो अत्यंत जटिल है। इस नियम के अनुसार नए पार्टनर को मंडी में मूल आवंटी की श्रेणी की दुकान की अधिकतम बोली राशि का 51 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य है, जो व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। इसके अतिरिक्त अन्य जटिल शर्तों के कारण प्रदेश में आज तक एक भी प्रोपराइटरशिप फर्म द्वारा पार्टनरशिप हेतु आवेदन नहीं किया गया है।
*भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश कोषाध्यक्ष अशोक अग्रवाल ताजपुरिया ,प्रदेश युवा कोषाध्यक्ष श्याम सिंहल , प्रदेश संगठन मंत्री संजय भदौरिया ने* मंडी समितियों में नए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पहले से ही जटिल है तथा वर्तमान में अत्यधिक समय लेने वाली हो गई है। इससे व्यापारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और प्रदेश सरकार को मंडी शुल्क के रूप में संभावित राजस्व की हानि होती है। जीएसटी प्रणाली की तर्ज पर नए लाइसेंस हेतु गारंटर की व्यवस्था समाप्त की जानी चाहिए तथा आवश्यक प्रपत्रों की संख्या भी कम की जानी चाहिए।
*राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक इंद्रविक्रम सिंह ने वार्ता में सभी समस्याओं को सुनकर सरलीकरण का आश्वासन दिया|
हरिओम की रिपोर्ट




