फर्जीवाड़े में नौकरी छूटी, राशन कार्ड भी गंवाया
पीड़ित ने डीएम से मांगी मदद, बोला—पिछले साल आया था CGST नोटिस
डिस्ट्रिक हेड | राहुल द्विवेदी
कानपुर। आधार और पैन कार्ड के कथित दुरुपयोग के चलते नौकरी और सरकारी राशन कार्ड गंवाने वाले एक पीड़ित ने सोमवार को जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह से न्याय की गुहार लगाई। मामले में जिलाधिकारी ने सेंट्रल जीएसटी विभाग के अधिकारियों को पत्र लिखकर प्रकरण समाप्त कराने और राशन कार्ड पुनः बनवाने का आश्वासन दिया है।
नौबस्ता निवासी ओमजी शुक्ला को 4 नवंबर 2025 को सेंट्रल जीएसटी विभाग से एक नोटिस प्राप्त हुआ था। नोटिस में उनके नाम पर पंजीकृत एक फर्म के जरिए 17 करोड़ 47 लाख 56 हजार 200 रुपये के टर्नओवर और 3 करोड़ 14 लाख 56 हजार 116 रुपये टैक्स बकाया होने का उल्लेख किया गया था।
भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने बताया कि नोटिस मिलने के बाद ओमजी शुक्ला की स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई। काकादेव स्थित एक कोचिंग सेंटर में गार्ड की नौकरी चली गई, जबकि जीविकोपार्जन के लिए चल रही चाय की दुकान भी बंद करनी पड़ी। 13 जनवरी 2026 को जब वह सरकारी राशन लेने पहुंचे तो पता चला कि उनका राशन कार्ड निरस्त कर दिया गया है। जांच में सामने आया कि 25 लाख रुपये से अधिक के जीएसटी टैक्स बकाया का हवाला देकर कार्ड रोक दिया गया है।
नोटिस का जवाब दिल्ली सेंट्रल जीएसटी कार्यालय भेजा था
पीड़ित ओमजी शुक्ला का कहना है कि उनका इस कथित फर्म या लेन-देन से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने नोटिस का जवाब दिल्ली स्थित सेंट्रल जीएसटी कार्यालय भेजा था, लेकिन वह पत्र वापस आ गया। इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी से शिकायत की।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने सेंट्रल जीएसटी अधिकारियों को पत्र लिखकर प्रकरण का निस्तारण करने और पीड़ित का राशन कार्ड दोबारा बनवाने का आश्वासन दिया है। इस दौरान अनुज त्रिपाठी, गौरव भदौरिया और सुयश त्रिवेदी भी मौजूद रहे।




