*क्या पुलिस की नजर में पत्रकार अपराधी हो गए है*
*क्या पुलिस प्रशासन के ख़िलाफ़ खबर चलाना अपराध है*
*क्या प्रशासन शासन पत्रकारों से डर रही है*
*पत्रकार के ऊपर फर्जी मुकदमे लिखना और लिखवाना आसान है क्यूंकि वो समाज आईना है और आईना हमेशा सच ही दिखाता और बताता है*
*आज कल पत्रकारों को टारगेट करना आम हो गया है जिसे मन आए वो मुँह उठाये थाने में जाकर पत्रकार के ख़िलाफ़ एप्लिकेशन दे और पुलिस तुरंत बड़ी बड़ी धाराएँ लगाने को एक दम से तैयार है*
*क्यूँकि पत्रकार ही है जो सच दिखा रहा है अरे जाँच करिए सत्यता देखिए इसके बाद जो सही है वो करिए लेकिन पुलिस पत्रकारों की आजादी क्यों छीन रही है*
*यह उन सभी पत्रकारों को सोचना चाहिए जो तलवे चाट चाट कर पहचान बना रहे है अरे किसी दिन तुम भी शिकार होंगे ये भी समझने की कोशिश कीजिए*
*देश का चौथा स्तंभ को ढहा रहे है लोग उनमें कुछ ख़ुद पत्रकार शामिल है पता होना चाहिए उसी पिलर में तुम भी हो ध्यान रखो अपने अस्तित्व को बचाओ और पत्रकारिता बचाओ नहीं तो यह देश में पत्रकारिता ही खत्म कर देंगें,अब पत्रकारो को एक जुट होना चाहिए लेकिन हाँ पत्रकार ही एक जुट होना की दलाल*
*आज कुछ लोग पत्रकारिता के नाम से दलाली कर रहे है लेकिन वो दलाल ख़ुश है और उनसे ख़ुश है प्रशासन क्यूँकि वो प्रशासन के मन मुताबिक़ कार्य करते है जबकि पत्रकार एक दम विपरीत*
डिस्टिक हेड
राहुल द्विवेदी की रिपोर्ट




