चंदौत में मोरंग माफिया बेलगाम: प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल, आखिर क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?
ब्यूरो चीफ – जालौन: शैलेन्द्र सिंह तोमर
जालौन जनपद के चंदौत दारिया क्षेत्र में अवैध खनन का खेल दिनोंदिन खतरनाक होता जा रहा है। खंड (1) की मोरंग खदान में नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम नदी की प्राकृतिक धारा में JCB और डंपर उतारे जा रहे हैं। इस पर न तो राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की चेतावनियाँ असर कर रही हैं और न ही जिला प्रशासन व खनिज विभाग की नज़र इस पर ठहर रही है। सवाल उठता है – कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या कारण है इस लापरवाही का?
जब धारा में दौड़ें मशीनें, और प्रशासन मौन हो…
गुरुवार और शुक्रवार को मौके से प्राप्त वीडियो और तस्वीरें इस बात की पुष्टि करती हैं कि पट्टा धारक तय सीमा से बाहर निकलकर सीधे नदी की मुख्य धारा में खनन करा रहा है। भारी मशीनों द्वारा की जा रही खुदाई से नदी की गहराई बढ़ गई है और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जो बाढ़ के खतरे को न्योता दे रहे हैं। इसके अलावा, नदी के जैवविविधता और पर्यावरणीय संतुलन को भी भारी नुकसान हो रहा है।
सवालों के घेरे में प्रशासन
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस अवैध खनन की शिकायत प्रशासनिक अफसरों से लेकर खनिज विभाग तक की, लेकिन न कोई निरीक्षण हुआ, न कोई कार्रवाई। यह चुप्पी साफ तौर पर मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है।
आखिर क्यों नहीं हो रही कार्रवाई?
विशेषज्ञों का मानना है कि कार्रवाई न होने के पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं:
प्रशासनिक मिलीभगत: स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और खनन माफिया के बीच गठजोड़ की आशंका।
राजनीतिक संरक्षण: कई बार ऐसे अवैध कार्यों को राजनीतिक रसूख का सहारा मिल जाता है।
विभागीय उदासीनता: खनिज विभाग की लचर निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही की कमी।
क्या करेगी सरकार?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन और शासन इस अवैध खनन को यूँ ही जारी रहने देगा? या फिर समय रहते सख्त कदम उठाकर न केवल पर्यावरण की रक्षा करेगा, बल्कि कानून की गरिमा भी बचाएगा?
यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में यह समस्या न सिर्फ स्थानीय निवासियों के लिए संकट बन सकती है, बल्कि एक बड़ी पर्यावरणीय आपदा को भी जन्म दे सकती है।




