राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा जटिल जियो वाहन टैगिंग व्यवस्था व गेट पास की बहुत ही कम समय सीमा आदि के आदेश से प्रभावित प्रदेश के 73 हजार कृषि उत्पाद के थोक व्यापारी व उद्यमी , 25 लाख से अधिक गल्ला , किराना व कृषि उत्पाद के फुटकर कारोबारियों के साथ मंडियों से जुड़े करोड़ों किसान भी अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे , वाहन टैगिंग व गेटपास की समय सीमा की व्यवस्था को वापस लिया जाए – ज्ञानेश मिश्र
वार्ता में यह बात केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से कहीं
उ प्र में राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा मंडियों में जियो ऐप द्वारा वाहन टैगिंग की समानांतर ऑनलाइन व्यवस्था, गेट पास में समय-सीमा संबंधी नियम, प्रोपराइटरशिप फर्मों को पार्टनरशिप में परिवर्तित करने के जटिल नियमों को वापस लेने और नए लाइसेंस प्रक्रिया में सरलीकरण आदि मुद्दों को लेकर प्रदेश के कई जिलों से आए व्यापारियों ने केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से विस्तृत वार्ता की और उन्हें सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा
केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने पूरे मामले को सुनकर उसका अध्ययन कर समाधान कराने का आश्वासन दिया
आज *भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र के नेतृत्व में* उ प्र में राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा प्रदेश की 251 मंडियों में जियो ऐप द्वारा वाहन टैगिंग की समानांतर ऑनलाइन व्यवस्था, गेट पास में समय-सीमा संबंधी नियम, प्रोपराइटरशिप फर्मों को पार्टनरशिप में परिवर्तित करने के जटिल नियमों को वापस लेने और नए लाइसेंस प्रक्रिया में सरलीकरण आदि मुद्दों को लेकर प्रदेश के कई जिलों से आए व्यापारियों ने केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से भाजपा कार्यालय में विस्तृत वार्ता की और उन्हें प्रदेश की गल्ला व सब्जी मंडियों, किराना बाज़ार,रुई ,लकड़ी आदि के व्यापारियों व उद्यमियों से संबंधित समस्याओं को लेकर सात सूत्रीय ज्ञापन सौंपा|
संगठन से जुड़े व्यापारी व उद्यमी भाजपा कार्यालय पहुंचे और
केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मिले| व्यापारियों और उद्यमियों ने प्रदेश की मंडियों से जुड़ी सात प्रमुख समस्याओं से उन्हें अवगत कराते हुए ज्ञापन भी सौंपा|
वार्ता में *भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि* राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद, उ प्र द्वारा कई नई व्यवस्थाओं से प्रदेश के कृषि उत्पाद के व्यापारी उद्यमी व अप्रत्यक्ष रूप से किसान परेशान हो रहे हैं इन समस्याओं का जल्द निदान कराया जाए |
कहा कि प्रदेश के अंदर कृषि उत्पाद की खरीद-बिक्री हेतु 6-आर, 9-आर, गेट पास तथा दूसरे राज्यों से कृषि उत्पाद को लाने हेतु प्री-अराइवल स्लिप जारी करने की ऑनलाइन व्यवस्था पहले से ही लागू है। पूर्व से लागू प्री-अराइवल स्लिप की ऑनलाइन प्रणाली के कारण मंडी शुल्क चोरी की कोई संभावना नहीं रहती, क्योंकि स्लिप जारी होते ही उसकी जानकारी मंडी परिषद के पोर्टल पर उपलब्ध हो जाती है।
ऐसी स्थिति में इस माह से जियोटैग ऐप के माध्यम से वाहन लोडिंग एवं अनलोडिंग के समय वाहन टैगिंग की एक और समानांतर ऑनलाइन व्यवस्था लागू करना “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” की अवधारणा के विपरीत है। इस नई व्यवस्था से व्यापारियों एवं उद्यमियों की कठिनाइयाँ बढ़ रही हैं|
आगे कहा कि प्रदेश में छोटी व बड़ी 251 गल्ला मंडियाँ हैं जिनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश व्यापारी इस प्रकार की तकनीकी व्यवस्था का सुचारु रूप से उपयोग नहीं कर पाएंगे। *परिणामस्वरूप किसानों को भी अपने उत्पाद बेचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है इसलिए इस व्यवस्था को वापस लिया जाए* |
आगे कहा कि मंडियों से एक जिले से दूसरे जिले में कृषि उत्पाद ले जाने हेतु जारी किए जाने वाले गेट पास में निर्धारित समय-सीमा अत्यंत कम एवं अव्यावहारिक है। कई मामलों में समय-सीमा समाप्त होने के आधार पर व्यापारियों एवं उद्यमियों पर दंड लगाया जा रहा है जबकि मंडी शुल्क चोरी की कोई संभावना नहीं होती। अतः यह व्यवस्था पूर्णतः अनुचित है इसलिए गेटपास में समय सीमा की व्यवस्था को वापस लिया जाए|
यह भी कहा कि मंडी अथवा कृषि उत्पाद आधारित उद्योगों से माल प्रेषित करते समय तथा गंतव्य स्थान पर पहुँचने के बाद प्रत्येक बार वाहन संख्या टैग करना अनिवार्य होगा। यह व्यवस्था गल्ला, दलहन, तिलहन, किराना, गुड़ तथा अन्य कृषि उत्पादों एवं उनसे संबंधित उद्योगों पर भी लागू होगी। किसी भी त्रुटि की स्थिति में दंडात्मक प्रावधान होने से व्यापारियों एवं उद्यमियों के उत्पीड़न की संभावना बढ़ जाएगी इसलिए इस व्यवस्था को वापस लिया जाए |
और गल्ला मंडियों व किराना बाजार से अन्य जिलों में भेजे जाने वाले छोटे वाहनों में कम मात्रा में माल होने पर भी गेट पास बनाना पड़ता है। *ऐसे वाहन ट्रांसपोर्ट नगर पहुँचकर अन्य वाहनों में माल स्थानांतरित करते हैं। इस स्थिति में पुनः वाहन टैगिंग कर पाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होगा* ।
यह भी कहा कि राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा पिछले वर्ष चना व भुना चना को एक ही मानते हुए भुना चना पर लागू मंडी शुल्क वापस लिया जाए|उप्र में गल्ला व सब्जी मंडियों में प्रत्येक वर्ष 5% किराया बढ़ रहा है , प्रत्येक वर्ष बढ़ने वाले किराए पर रोक लगाकर इसे स्थिर किया जाए|
और साथ ही प्रदेश की शहरी व बड़ी ग्रामीण मंडियों में अनाज को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज व आधुनिक गोदाम बनाए जाए|
*इस दौरान भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश संगठन महामंत्री बनवारीलाल गुप्ता व प्रदेश संयुक्त महामंत्री कृष्ण कुमार गुप्ता रामू ने कहा कि* गत वर्ष मंडी परिषद द्वारा प्रोपराइटरशिप फर्मों को पार्टनरशिप में परिवर्तित करने का प्रावधान लागू किया गया, जो अत्यंत जटिल है। इस नियम के अनुसार नए पार्टनर को मंडी में मूल आवंटी की श्रेणी की दुकान की अधिकतम बोली राशि का 51 प्रतिशत जमा करना अनिवार्य है, जो व्यवहारिक रूप से संभव नहीं है। इसके अतिरिक्त अन्य जटिल शर्तों के कारण प्रदेश में आज तक एक भी प्रोपराइटरशिप फर्म द्वारा पार्टनरशिप हेतु आवेदन नहीं किया गया है।
*भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रदेश कोषाध्यक्ष व अशोक अग्रवाल ताजपुरिया व प्रदेश युवा कोषाध्यक्ष श्याम सिंहल ने* मंडी समितियों में नए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पहले से ही जटिल है तथा वर्तमान में अत्यधिक समय लेने वाली हो गई है। इससे व्यापारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और प्रदेश सरकार को मंडी शुल्क के रूप में संभावित राजस्व की हानि होती है। जीएसटी प्रणाली की तर्ज पर नए लाइसेंस हेतु गारंटर की व्यवस्था समाप्त की जानी चाहिए तथा आवश्यक प्रपत्रों की संख्या भी कम की जानी चाहिए।
कानपुर से *उत्तर प्रदेश दाल मिलर्स एसोसिएशन से मंत्री केके गुप्ता व कानपुर की चकरपुर हरी सब्जी व्यापार मंडल के अध्यक्ष सौरभ पांडेय ने कहा कि* राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की नई व्यवस्थाओं से कृषि उत्पाद के व्यापारी उद्यमी व मिलर्स सभी परेशान हैं।अगर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो हम व्यापार और उद्योग बंद करने पर मजबूर हो जाएंगे |
*केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी जी ने पूरी बात सुनकर व ज्ञापन को अध्ययन करने के उपरांत समस्या के समाधान का आश्वासन दिया* |
ज्ञापन देने वालों में लखनऊ, कानपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा व अन्य कई जिलों से आए प्रमुख रूप से प्रदेश संगठन महामंत्री बनवारीलाल गुप्ता , प्रदेश कोषाध्यक्ष अशोक अग्रवाल ताजपुरिया व प्रदेश युवा कोषाध्यक्ष श्याम सिंघल, प्रदेश संयुक्त महामंत्री कृष्ण कुमार गुप्ता रामू,कानपुर जिला कोषाध्यक्ष मनोज गुप्ता कुक्कू, कानपुर जिला संयुक्त महामंत्री केके गुप्ता,कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के कानपुर जिलाध्यक्ष अनुराग जायसवाल, कानपुर की चकरपुर हरी सब्जी व्यापार मंडल अध्यक्ष सौरभ पांडे , टिंबर उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश कार्यवाहक अध्यक्ष प्रवीण दीक्षित, किराना कारोबारी गिरीश पाण्डेय आदि थे |
भवदीय
ज्ञानेश मिश्र
राष्ट्रीय अध्यक्ष
भारतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल की तरफ से
ज्ञापन में दी गई सात सूत्रीय मांग का विवरण–
1-दिनांक 01 जुलाई 2026 से लागू जियोटैग ऐप द्वारा वाहन लोडिंग की समानांतर ऑनलाइन व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
2. गेट पास में निर्धारित समय-सीमा संबंधी नियम को समाप्त किया जाए।
3. प्रोपराइटरशिप फर्मों को पार्टनरशिप में परिवर्तित करने संबंधी जटिल नियमों को वापस लेकर सरल एवं व्यावहारिक व्यवस्था लागू की जाए।
4. जीएसटी प्रणाली की तर्ज पर नए मंडी लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए व गारंटर की अनिवार्यता समाप्त की जाए तथा आवश्यक प्रपत्रों की संख्या कम की जाए|
5. राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद द्वारा पिछले वर्ष चना व भुना चना को एक ही मानते हुए भुना चना पर लागू मंडी शुल्क वापस लिया जाए|
6. उप्र में गल्ला व सब्जी मंडियों में प्रत्येक वर्ष 5% किराया बढ़ रहा है , प्रत्येक वर्ष बढ़ने वाले किराए पर रोक लगाकर इसे स्थिर किया जाए|
7- प्रदेश की शहरी व बड़ी ग्रामीण मंडियों में अनाज को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज व आधुनिक गोदाम बनाए जाए|
हरिओम की रिपोर्ट




