संत शेरसिंह के 37वें महापरिनिर्वाण दिवस पर एजुकेशनल ट्रस्ट ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
ट्रस्ट के चैयरमेन प्रो.हंसराज सुमन ने की शिक्षा,साहित्य,समाज और पत्रकारिता जगत की 20 हस्तियों को सम्मानित करने की घोषणा।
नई दिल्ली।
दिल्ली देहात के गाँव लिबासपुर में जन्में संत शेरसिंह के 37 वें महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर दिल्ली विश्वविद्यालय उत्तरी परिसर के कला संकाय में संत शेरसिंह रिसर्च एण्ड एजुकेशनल ट्रस्ट रजि.की ओर से उनकी पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर संत शेरसिंह के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित करते हुए उनके सामाजिक कार्यों को याद किया गया। इस अवसर पर उनके सामाजिक कार्यों का उल्लेख किया,संत शिरोमणी कबीर संबंधी उनके विचारों की व्याख्या की तथा उनके गाए गए पदों का पाठ किया। कार्यक्रम में ट्रस्ट के चेयरमैन प्रो हंसराज सुमन,सरिता पाटिल सुमन,पल्लवी प्रियदर्शिनी,डॉ.योगेंद्र पाटिल,प्रदीप पाटिल,प्रसून पाटिल,उत्कर्ष पाटिल,गणेश राज,अविनाश बनर्जी,संदीप कुमार तोमर,राज चौहान,महिपाल पाटिल आदि लोगों ने इस आयोजन को भव्य एवं गरिमामय बनाया ।
ट्रस्ट के चेयरमैन सुमन ने संत शेरसिंह का स्मरण करते हुए कहा कि संत शेरसिंह कबीर साहेब के सच्चे अनुयायी थे। वे मध्यकालीन संत परम्परा के सर्वश्रेष्ठ क्रांतिकारी कवि संत कबीर साहेब से विशेष प्रभावित थे। अपने जीवन को उन्होंने कबीर साहेब के विचारों से पूरी तरह से ढाल लिया था। वे दिल्ली और हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में रह रहे लोगों को कबीर साहेब की वाणी, शबद, रमैनी को गाकर सुनाते थे।उनसे प्रभावित होकर बहुत से लोग उनके शिष्य बन गए थे।उन्होंने बताया कि महात्मा कबीर के विचारों के प्रचार प्रसार के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पित कर दिया था। कबीर साहेब द्वारा रचित उनकी साखियाँ, बीजक,रमैनी, शबद को गा-गाकर वे आम लोगों के बीच मानवता एवं भाईचारे का प्रचार प्रसार करते रहे। समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने में जिस तरह से कबीर साहेब ने प्रयास किया संत शेर सिंह ने उसी का अनुकरण करते हुए कबीर साहेब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाया। संत शेरसिंह ने समाज में फैली विसंगतियों,छुआछूत, जातिप्रथा,धार्मिक आडंबर, हिंसा तथा भ्रष्टाचार के विरुद्ध आम लोगों में जन जागृति फैलाई।उनके शिष्यों ने कबीर साहेब की वाणियों का गायन करते हुए समाज में जागरूकता का संदेश दिया। उन्होंने भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रशासन तक अपनी आवाज़ पहुंचाई। वे ऐसे समाज का सपना देखते थे जहाँ आपसी सौहार्द, भाईचारा,एक-दूसरे के प्रति सहयोग की भावना एवं समानता का भावबोध हो। वह समझते थे कि सामाजिक समरसता बनाए रखने के लिए और मूलभूत परिवर्तन के लिए कबीर साहेब की वाणी सबसे उत्तम है। किसी भी तरह के आडम्बर, पाखंडवाद और धार्मिक कुरीतियों में विश्वास नहीं करते थे।समाज में फैली वैमनस्यता को दूर करना उनकी प्राथमिकता थी।
प्रो. सुमन ने बताया कि समाज के वंचित, पिछड़े और दलित वर्ग के लोगों को सामाजिक विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए संत शेरसिंह जीवन पर्यंत प्रयास करते रहे। आजादी के बाद देश में आर्थिक संकट और गरीबी से जनता तबाह हो रही थी। उस समय समाज के उपेक्षित और वंचित वर्गों का जीवन बेहतर बनाने के लिए उनके बीच कार्य करना बहुत जरूरी था। ऐसी स्थिति में समाज सेवा बहुत हिम्मत का काम था। क्योंकि देश की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं थी। तमाम विपरीत परिस्थितियों में संत शेरसिंह ने समाज सेवा का कार्य स्वयं के प्रयास से शुरू किया। उन्होंने अपने गाँव में समाज के उपेक्षित वर्गों के लिए समुदाय भवन, बीस सूत्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत भूमि का वितरण कराना व भूमिहीनों को सरकार से आवासीय प्लाट दिलवाना तथा युवा पीढ़ी को कबीर साहेब के विचारों से अवगत कराना जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए। प्रो.सुमन का कहना है कि ऐसे समाज सुधारक के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए समाज के प्रबुद्ध वर्ग को आगे आना चाहिए, जिससे कि उपेक्षित और वंचित समाज का जीवन बेहतर हो सके। संत शेरसिंह रिसर्च एण्ड एजुकेशनल ट्रस्ट की स्थापना का उद्देश्य भी सामाजिक समरसता और मानवता की स्थापना करना है। संत शेरसिंह ट्रस्ट 11अक्टूबर 2026 में शिक्षा, साहित्य,पत्रकारिता तथा समाज सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे 20 महान विभूतियों को सम्मानित करता रहा है। ट्रस्ट का यह कार्य आगे भी जारी रहेगा।
प्रो.हंसराज सुमन ने संत शेरसिंह के महापरिनिर्वाण दिवस पर अक्टूबर में होने वाले सम्मान समारोह की घोषणा करते हुए बताया है कि 11 अक्टूबर 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय पीजीडीएवी कॉलेज में प्रोफेसर मनोज कुमार कैन को इस वर्ष का अंतर्राष्ट्रीय कबीर रत्न अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा । इसके अलावा प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो.हरिओम दहिया ,अंग्रेजी की विदुषी प्रो.संगीता मित्तल,प्रो.संदीप कुमार,प्रो.प्रमोद कुमार,जज श्री जगमोहन सिंह , डॉ.के.योगेश,भू वैज्ञानिक प्रो.विंध्यावासिनी पांडेय , युवा भूगोल शास्त्री डॉ.सुभाष आनंद,प्रो.गीता सहारे,डॉ. विकास यादव-युवा नेता, डॉ.बलवान सिंह बिबयान-संपादक
,स्टार सवेरा,श्री सत्यपाल बौद्ध-संपादक-दैनिक सीमांत रक्षक,डॉ.पदम गंगोत्रा,श्री सत्यपाल बौद्ध,संसद टीवी के एंकर वरिष्ठ पत्रकार डॉ. मनोज वर्मा,आज तक डिजिटल न्यूज से मानसी मिश्रा आदि को शाल , प्रशस्ति पत्र,पटका,स्मृति चिन्ह और अन्य सामग्री देकर सम्मानित करेगा।प्रो.मनोज कैन को सम्मान स्वरूप 11 हजार रुपये,शॉल,स्मृति चिन्ह,पटका व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित करेगा। हंसराज जी ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रो.मनोज कुमार कैन,शिक्षक कवि ,लेखक एवं आलोचक के होने के साथ-साथ इनका पत्रकारिता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उल्लेखनीय योगदान है।दिल्ली विश्वविद्यालय के पीजीडीएवी कॉलेज के हिंदी विभाग में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं । इन्हें दो दर्जन सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है । इन्होंने नाटक/एकांकी एवं आलोचना की पुस्तकें लिखी है तथा निरंतर युवा पीढ़ी का मार्गदर्शन कर रहे हैं।प्रो कैन विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक,सांस्कृतिक संस्थानों में सक्रिय भूमिका निभाकर समाज को जागृत करने का बड़ा काम कर रहे हैं।इनकी सृजनशीलता, कर्मठता और अनेक सेवाओं को देखते हुए ट्रस्ट इन्हें सम्मानित करते हुए गौरवान्वित अनुभव कर रहा है ।
ट्रस्ट की उपाध्यक्ष सुश्री पल्लवी प्रियदर्शिनी ने बताया है कि इस रिसर्च एण्ड एजुकेशनल ट्रस्ट के अंतर्गत समाज में किन्हीं कारणों से पीछे रह गए बच्चों को शिक्षा प्रदान कराना, स्कूल छोड़कर चले गए बच्चों को जागरूक कर पुनः स्कूल तक लाना, उन्हें शिक्षा दिलाना ट्रस्ट की प्राथमिकता रहा है। बच्चों को शिक्षा, खेल, विज्ञान, मीडिया के क्षेत्रों में प्रतिभा सम्पन्न बनाना इस ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य रहा है। स्त्री शिक्षा को ध्यान में रखते हुए बालिकाओं को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना तथा अभावग्रस्त बालिकाओं को उनकी शिक्षा के लिए मदद करना ट्रस्ट के प्रमुख कार्य रहे हैं। मिल मजदूरों तथा कृषि क्षेत्र के मजदूरों के बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान कर उन्हें कौशल आधारित शिक्षा के द्वारा बेहतर जीवनयापन के योग्य बनाना ट्रस्ट का कार्य रहा है। इस ट्रस्ट ने अपने सामाजिक कार्यों का विस्तार जनजातीय क्षेत्रों में भी किया है। वहाँ के लोगों से संपर्क करते हुए उनके बच्चों को शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना तथा जनजातीय क्षेत्र को देश की मुख्य धारा में शामिल करने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया गया है।
ट्रस्ट के सदस्य डॉ. योगेंद्र पाटिल ने कहा कि फिलहाल यह ट्रस्ट एक व्यापक सामाजिक फलक पर कार्य कर रहा है। दलित समाज के उद्धार के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण के माध्यम से कार्यक्रम चलाया जा रहा है। उनको संविधान की मुख्य धाराओं से परिचित कराया जा रहा है जिससे वे संविधान प्रदत्त अपने अधिकारों को समझ सकें। उन्होंने बताया है कि भविष्य में उच्च शिक्षा के मद्देनजर ऐसे विषयों पर शोध कार्य के लिए प्रोत्साहित भी किया जाएगा तथा ट्रस्ट से जुड़े छात्रों को शोधकार्य संबंधी सामग्री उपलब्ध कराने के लिए संस्थान कटिबद्ध रहेगा। ऐसे शोधार्थियों के छात्रवृत्ति की व्यवस्था ट्रस्ट द्वारा की जाएगी। दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों को सरकारी अनुदान और छात्रवृत्ति उपलब्ध कराने के लिए भी ट्रस्ट सहयोग करता रहेगा।
संत श्री शेरसिंह के महापरिनिर्वाण के अवसर पर शेरसिंह फाउंडेशन के सदस्यों, कार्यकर्ताओं के अतिरिक्त बहुत से सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। सभी आगंतुकों ने संत शेरसिंह के सामाजिक कार्यों की चर्चा करते हुए उनको आगे बढ़ाने की बात कही। दिल्ली विश्वविद्यालय एससी/एसटी, ओबीसी टीचर्स फोरम के अध्यक्ष प्रो. के.पी.सिंह ने संत शेरसिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ट्रस्ट के समक्ष प्रस्ताव रखा कि – यह ट्रस्ट दिल्ली के गांवों में गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा तथा उनके कॅरियर संबंधी विशेष कार्यशाला का आयोजित कराए जिससे कि उपेक्षित समाज के लोगों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन मिले। उन्होंने आगे कहा कि ट्रस्ट द्वारा किसी भी विषय में कमजोर विद्यार्थियों के लिए विशेष कोचिंग क्लास की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसके अलावा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ट्रस्ट के सदस्यों को व्यवस्था करनी चाहिए जिससे कि दलित, पिछड़े समाज के छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर परिणाम दे सकें। संत शेरसिंह के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके किए गए कार्यों को आगे बढ़ाया जाए और उनके विचारों को समाज में प्रचारित किया जाए। उन्होंने समाज सेवा का जो रास्ता दिखाया है उसके अनुसरण की आज जरूरत है। उनके सपनों को साकार करने के लिए आज की पीढ़ी को अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। प्रोफेसर के.पी.सिंह के प्रस्ताव को ट्रस्ट ने सर्व सम्मति से स्वीकार किया और जल्द ही इस दिशा में कार्य शुरू करने के लिए कटिबद्धता जताई।
संत शेरसिंह को याद करते हुए उनके समकालीन लोगों ने अपने संस्मरण साझा किए। लोगों ने उनके कार्यों को समाज सुधार से संबोधित किया। आज जब समाज में बहुत सी विकृतियाँ आ गई हैं, चारो तरफ विघटन और विभाजन होने लगा है। जाति, धर्म और क्षेत्रीयता की भावना बढ़ने लगी है ऐसे में संत शेरसिंह के विचारों के प्रचार प्रसार की जरूरत महसूस होने लगी है। प्रबुद्ध वक्ताओं के विचार थे कि यह ट्रस्ट सक्रिय हो कर लोगों के बीच उनके विचारों को बैनर पोस्टर और पम्फलेट के जरिए लोगों में साझा करें। कार्यक्रम के अंत में डॉ . योगेंद्र पाटिल ने आए हुए विशिष्ट जनों का धन्यवाद किया ।




