भारत विकास परिषद द्वारा विश्व वन्यजीव दिवस समारोह आयोजित किया गया।

प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित किए बिना स्थायी विकास संभव नहीं है- प्रो. राधेश्याम शर्मा
नई दिल्ली।
भारत विकास परिषद की पर्यावरण गतिविधि द्वारा विश्व वन्यजीवन दिवस के अवसर पर दिल्ली के केंद्रीय कार्यालय में एक भव्य एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण,जैव-विविधता के महत्व तथा सतत विकास की दिशा में समाज को प्रेरित करना था।कार्यक्रम में शिक्षाविद्,पर्यावरणविद्, छात्र एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में सुरेश जैन राष्ट्रीय संगठन मंत्री,भारत विकास परिषद की उपस्थिति रही।अपने उद्बोधन में उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रकृति की रक्षा करना मानव का नैतिक दायित्व है।
उन्होंने उपस्थित जनों को भारत विकास परिषद की पाँचों प्रमुख गतिविधियों से अवगत कराते हुए विस्तार से बताया कि परिषद किस प्रकार शिक्षा,स्वास्थ्य,
संस्कार,सेवा एवं समर्पण के माध्यम से समाज के गरीब एवं वंचित वर्गों की सहायता करती है।उन्होंने कहा कि परिषद का उद्देश्य केवल पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, बल्कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सेवा पहुँचाना है।
मुख्य वक्ता प्रो. राधेश्याम शर्मा,विभागाध्यक्ष,पर्यावरण अध्ययन विभाग,दिल्ली विश्वविद्यालय ने प्रेरणादायक व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने व्यक्तिगत एवं सामुदायिक स्तर पर छोटे-छोटे प्रयासों द्वारा सतत विकास की दिशा में योगदान देने पर बल दिया।उन्होंने “Nature is First and Human is Second”के सिद्धांत को अपनाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित किए बिना स्थायी विकास संभव नहीं है। साथ ही,युवाओं को इकोलॉजिकल एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को नवाचार से जोड़ने का आह्वान किया।
विशिष्ट वक्ता डॉ. गौरव बरहोडिया सहायक प्रोफेसर, रामानुजन कॉलेज,दिल्ली विश्वविद्यालय ने साँपों पर वैज्ञानिक प्रस्तुति दी।उन्होंने बताया कि भारत में लगभग 350 प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें से केवल लगभग 10 प्रतिशत ही विषैली होती हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश साँप पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में प्रो.निरंजन कुमार,डीन प्लानिंग दिल्ली विश्वविद्यालय तथा डॉ. जे. आर.भट्ट,राष्ट्रीय संयोजक, पर्यावरण गतिविधि ने भी अपने विचार व्यक्त किए और वन्यजीव संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में राकेश शर्मा,अरिहंत जैन,राजकुमार बग्गा,की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में दिल्ली विश्वविद्यालय के अनेक प्रोफेसर और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।सभी ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया। जिसमें उपस्थित जनों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का समापन वन्यजीव संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।




