*बजट पर यूपी कांग्रेस के दीपक सिंह की प्रतिक्रिया*
*उत्तर प्रदेश का बजट और सरकार के विकास के दावे सत्यम कंप्यूटर के बी. रामलिंगा राजू की बैलेंसशीट जैसे हैं- दीपक सिंह*
– काग़ज़ों में सब ठीक दिखता है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त बिल्कुल अलग है। यह विकास का नहीं, बल्कि काग़ज़ी दावों और ज़मीनी नाकामी का दस्तावेज़ है- दीपक सिंह
किसान आज घाटे में है। डीज़ल, बिजली, खाद और बीज की कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं। खेती की लागत तेज़ी से बढ़ी है, लेकिन फसल का दाम उसी अनुपात में नहीं बढ़ा। मुनाफ़ा घटा है, फिर भी सरकार काग़ज़ों में किसान की आय बढ़ने का दावा कर रही है।
युवा बेरोज़गार हैं और शिक्षा लगातार महंगी होती जा रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे अहम विभागों में अधिकारी और कर्मचारी रिटायर हो चुके हैं, लेकिन उनके स्थान पर नई भर्तियाँ नहीं हो रही हैं। लाखों सरकारी पद रिटायरमेंट के बाद भी खाली पड़े हैं। न तो नए बड़े शिक्षण संस्थान खुले और न ही सरकारी शिक्षा को मज़बूत किया गया, जिससे आम परिवार निजी और महंगी शिक्षा पर मजबूर है।
स्वास्थ्य सेवाओं की हालत भी इसी तरह चिंताजनक है। अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स और स्टाफ की भारी कमी है। दूसरी ओर, पूर्व में स्थापित कई उद्योग बंद हो चुके हैं, जिससे रोज़गार के अवसर लगातार कम होते गए हैं।
कृषि समेत कई विभाग ऐसे हैं जो पिछले बजट में जारी किए गए धन को आज तक खर्च नहीं कर पाए। सरकार ने अभी तक कुल बजट का लगभग 50% ही खर्च पाई है जीनमे नगर विकास में 47% PWD केवल 60% में नमामि गंगे में मात्र 39% तो यह साबित करता है सरकार बजट तो पेश कर रही पर खर्च नहीं कर पा रही है। विकास के नाम पर बजट तो पास होता है, लेकिन ज़मीन पर काम नहीं दिखता। वहीं CAG की रिपोर्टों ने कई विभागों में गंभीर अनियमितताओं और धन के दुरुपयोग की बात सामने आई है। लोकायुक्त ने सैकड़ों भ्रष्टाचार के मामलों में सरकार को लिखित सिफ़ारिशें भेजीं, लेकिन आज तक उन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
हर घर जल जैसी योजना देश का सबसे बड़ा घोटाला बनने की ओर बढ़ रही है, जहाँ काग़ज़ों में काम पूरा दिखाया जा रहा है, लेकिन ज़मीन पर न पानी है और न जवाबदेही।
यह बजट किसान को राहत नहीं देता, युवा को रोज़गार नहीं देता और शिक्षा व स्वास्थ्य को मज़बूत नहीं करता। यह उत्तर प्रदेश के विकास की सच्ची तस्वीर नहीं, बल्कि प्रचार और आंकड़ों का खेल है। प्रदेश में सरकारी दफ़्तरों का भ्रष्टाचार विश्व रिकार्ड बना रहा है। सरकार अब जनता को कागज़ी दावों की नहीं, जवाबदेही की ज़रूरत है।




