मीरगंज में आशा कार्यकत्री और शहर में दुकानदार की झोलाछाप के इंजेक्शन से मौत, स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी फिर उजागर
फिरोज खान
बरेली में झोलाछापों का कहर: पांच घंटे में दो मौतें, स्वास्थ्य विभाग मौन”
बरेली: जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही एक बार फिर मौत की वजह बन गई। शुक्रवार को महज पांच घंटे के भीतर दो अलग-अलग इलाकों में दो निर्दोष लोगों की जान चली गई। पहली घटना मीरगंज के बहरौली गांव की है, जहां गांव की आशा कार्यकत्री सुनीता को गलत इंजेक्शन लगाने से मौत हो गई। दूसरी घटना बरेली शहर के किला थाना क्षेत्र की है, जहां एक दुकानदार झोलाछाप के इलाज से दम तोड़ बैठा। दोनों मामलों में共 समान बात यही है कि इलाज करने वाले के पास न कोई डिग्री थी और न ही कानूनी हक।
मीरगंज: बिना जांच के इंजेक्शन, मां की मौत से बेसहारा हुए तीन बच्चे
45 वर्षीय सुनीता, जो गांव की आशा कार्यकत्री थीं, शुक्रवार को तेज बुखार होने पर गांव के ही एक कथित डॉक्टर के पास इलाज के लिए गईं। उनके पति रामवीर के मुताबिक, डॉक्टर ने बिना किसी जांच के सुनीता को एक इंजेक्शन लगा दिया, जिससे उनकी हालत बिगड़ गई और कुछ ही देर में उनकी मौत हो गई। सुनीता की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। तीन छोटे बच्चों की मां की असमय मौत ने घर को पूरी तरह बेसहारा कर दिया है।
पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, लेकिन सवाल उठता है कि ऐसे झोलाछाप डॉक्टर गांवों में खुलेआम कैसे इलाज कर रहे हैं और प्रशासन अब तक क्यों सोया हुआ है?
बरेली शहर में भी मौत, स्वास्थ्य विभाग की नींद गायब
इसी दिन शहर के किला इलाके में भी एक दुकानदार ने इलाज के नाम पर मौत पाई। एक झोलाछाप डॉक्टर के गलत इलाज से उसकी तबीयत बिगड़ी और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पूरे शहर में दर्जनों गैरकानूनी क्लीनिक धड़ल्ले से चल रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदे बैठा है। इन क्लीनिकों में न डॉक्टर की डिग्री होती है, न लाइसेंस—फिर भी खुलेआम लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है।
जिम्मेदार कौन? कब जागेगा स्वास्थ्य विभाग?
बरेली में झोलाछाप डॉक्टरों का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि अब ये न केवल गांवों में बल्कि शहरी इलाकों में भी पैर पसार चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग की नाकामी हर मौत के साथ और साफ हो रही है। सुनीता और दुकानदार की मौतें न पहली हैं और न ही आखिरी, अगर सिस्टम नहीं जागा तो हर गांव-हर गली में जिंदगी यूं ही सस्ती होती रहेगी।




