सीएसए में रक्तदान शिविर का हुआ आयोजन,30 यूनिट रक्त एकत्रित
चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर में राष्ट्रीय सेवा योजना के तत्वावधान में एक दिवसीय स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर कुलपति डॉ संजीव गुप्ता के कुशल मार्गदर्शन में जीवनधारा चैरिटेबल ब्लड सेंटर, कानपुर के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आयोजन एनएसएस कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रश्मि सिंह के नेतृत्व में किया गया। इसमें कानपुर परिसर की विभिन्न एनएसएस इकाइयों के कार्यक्रम अधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की, जिनमें डॉ. राजीव कुमार, एनएसएस इकाई-01; डॉ. अरुण कुमार एनएसएस इकाई-02; डॉ. संघमित्रा महापात्रा एनएसएस इकाई-03; तथा डॉ. उमनाथ शुक्ला एनएसएस इकाई-07 और डॉ. अर्चना सिंह और डॉ. एकता शर्मा शामिल रहे। टीचिंग एसोसिएट्स एलेना तकहेल्लामबम एवं स्वप्निल सिंह ने भी कार्यक्रम में सक्रिय रूप से सहभागिता की। कार्यक्रम में कुलपति मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि निदेशक, छात्र कल्याण ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की। अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया गया तथा स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया गया। शिविर में कुल 150 विद्यार्थियों, जिनमें 66 छात्राएं एवं 84 छात्र शामिल थे, ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। शिविर का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता उत्पन्न करना तथा जीवन बचाने के इस पुनीत कार्य में योगदान देने के लिए प्रेरित करना था। रक्तदान के साथ-साथ प्रतिभागियों के लिए निःशुल्क हीमोग्लोबिन परीक्षण एवं बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) मापन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होने का अवसर मिला। प्रतिभागियों को जलपान भी उपलब्ध कराया गया। शिविर का सफल आयोजन विश्वविद्यालय एवं एनएसएस इकाइयों की सामाजिक उत्तरदायित्व, सामुदायिक सेवा, स्वैच्छिक रक्तदान तथा स्वास्थ्य जागरूकता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
फसल अवशेष प्रबंधन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारम्भ
– किसानों को दिखाई कृषि यंत्रों के प्रयोग की लघु फिल्म
कानपुर नगर, किचंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र दलीप नगर द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम (8 से 12 सितंबर 2026 ) का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में किसानों को फसल अवशेषों को न जलाने के लिए जागरूक किया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि रहे केंद्र के प्रभारी डॉ अजय कुमार सिंह ने किसानों से कहा कि फसल अवशेषों में आग न लगाकर उन्हें खेत में सड़ा कर ही खाद बनाएं। इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बरकरार रहेगी।
कार्यक्रम में डॉ. निमिषा अवस्थी ने कहा कि फसल अवशेषों में आग लगने से पर्यावरण प्रदूषित होता है। इसके साथ ही मनुष्य का स्वास्थ्य भी काफी हद तक प्रभावित होता है। इसमें बच्चे बुजुर्ग व गर्भवती महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। उन्होंने बताया कि जनपद में धान व गेहूं का फसल चक्र मुख्य है। जिससे काफी मात्रा में फसल अवशेष होता है। आग लगने से मृदा में उपस्थित सूक्ष्म जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। डॉक्टर निमिषा ने बताया कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों का जागरूक होना अति आवश्यक है। इस अवसर पर किसानों को फसलों में प्रयोग होने वाले प्रमुख कृषि यंत्रों की लघु फिल्म भी दिखाई गई। कार्यक्रम का सफल संचालन वैज्ञानिक डॉ. शशिकांत द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ राजेश राय, डॉक्टर खलील खान, डॉक्टर अरुण कुमार सिंह,डॉक्टर दीपक मिश्रा सहित प्रगतिशील किसान शिवकुमार, विवेक कुमार,राहुल कुमार, कुलदीप,विष्णु कुमार,राजू राजपूत एवं माया देवी सहित 25 किसानों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया।




