गोवर्धन पूजा व भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन
कानपुर नगर, राधा माधव मंदिर के ब्लॉक किदवई नगर में चल रही श्रीमदभागवत कथा में पांचवें दिन *कथा व्यास पंडित दीपक कृष्ण जी महाराज भगवान ने* कथा में बताया कि गिरिराज गोवर्धन भगवान की पूजा प्रारंभ करवाया और इन्द्र की पूजा बंद करवा दी जिससे कुपित होकर इन्द्र ने ब्रज मंडल में मूसलाधार बारिश की किन्तु ब्रज में किसी का बाल बांका भी नहीं हुआ भगवान श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी कनिष्ठिका अंगुली पर धारण कर सबकी रक्षा की और गिरिधारी कहलाए|
भगवान ने कंस का वध करके अपने नाना उग्रसेन को राजगद्दी पर बिठाया भगवान का यज्ञोपवीत संस्कार हुआ प्रभु गुरु शिष्य परंपरा का पालन करने के लिए सांदिपनी मुनि के यहां गए और 64 दिन में 64 कलाओं का ज्ञान प्राप्त किया और गुरु दक्षिणा में उनके मृत पुत्र को लाकर प्रदान किया|
भगवान ने गोपिकाओ को समझाने के लिए अपने मित्र उद्धव जी को भेजा जो परम ज्ञानी थे लेकिन गोपिकाओ के प्रेम के आगे उनका ज्ञान उन्हें गूदडी के समान लगा जिस स्थान पर उन्होंने अपने ज्ञान का त्याग किया वह स्थान ज्ञान गूदडी के नाम से प्रसिद्ध हो गया|
भगवान ने जरासंध का वध कर दिया और समुद्र के बीच में द्वारिका पुरी बसाई और द्वारिकाधीश कहलाए मैया रुक्मिणी के निवेदन पर भगवान ने महाराज भीषमक की नगरी में पहुंच कर देवी मंदिर से उनका हरण किया और द्वारिका पुरी ले गए जहां उनका विवाह हुआ सम्पन्न हुआ इस अवसर पर समस्त भक्तों ने भगवान के विवाह महोत्सव का आनन्द लिया|
आयोजन में प्रमुख रूप से राधामाधव मंदिर सेवा समिति के अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र, मंदिर के पुजारी पंडित तारापति शास्त्री, मोहित शास्त्री, उमेश मिश्र, संजय गुप्ता, प्रखर श्रीवास्तव, शरद मिश्र आदि थे |
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